
अध्याय 1
रात के लगभग 11 बजे थे।
पूरा शहर बारिश में भीग चुका था।
सड़क पर सिर्फ गाड़ियों की हल्की आवाजें और स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बची थी।
रेयांश अपनी black bike पर बिना किसी मंजिल के घूम रहा था।
उसकी आंखों के नीचे नींद नहीं...
सिर्फ थकान थी।
दिल में ऐसा खालीपन था जिसे वो खुद भी समझ नहीं पाता था।
उसने bike एक छोटी सी coffee shop के सामने रोकी।
वो अक्सर यहां आता था...
क्योंकि यहां कोई उससे सवाल नहीं करता था।
रेयांश अंदर गया।
काले hoodie से उसका आधा चेहरा छुपा हुआ था।
तभी उसकी नजर window side पर बैठी एक लड़की पर गई।
सफेद sweater...
गीले बाल...
और आंखों में अजीब सी उदासी।
इनाया।
वो बाहर बारिश को ऐसे देख रही थी...
जैसे किसी का इंतजार कर रही हो।
लेकिन सच ये था...
उसे कोई लेने आने वाला नहीं था।
रेयांश ने पहली बार किसी लड़की को इतनी देर तक देखा था।
ना उसकी खूबसूरती की वजह से...
बल्कि उसकी आंखों में वही दर्द था...
जो खुद रेयांश अपने अंदर छुपाए बैठा था।
इनाया ने अचानक उसकी तरफ देखा।
दोनों की नजरें मिलीं।
कुछ सेकंड...
बस खामोशी।
लेकिन उस खामोशी में भी जैसे हजार बातें हो चुकी थीं।
रेयांश ने नजर हटाई और जाकर सामने वाली seat पर बैठ गया।
"One black coffee."
उसकी भारी आवाज सुनकर इनाया हल्का सा मुस्कुराई।
"इतनी रात में black coffee... नींद नहीं आती क्या?"
रेयांश ने पहली बार किसी unknown लड़की की बात सुनी थी।
वो कुछ सेकंड उसे देखता रहा।
"नींद सिर्फ खुश लोगों को आती है।"
ये सुनते ही इनाया की मुस्कान थोड़ी धीमी पड़ गई।
क्योंकि वो भी खुश नहीं थी।
बाहर बारिश और तेज हो चुकी थी।
Coffee shop में अब सिर्फ वो दोनों बचे थे।
इनाया धीरे से बोली—
"कभी-कभी ना...
ऐसा लगता है कि हम लोगों की जिंदगी में सिर्फ दर्द permanent होता है।"
रेयांश उसकी बातें ध्यान से सुन रहा था।
पहली बार कोई उसकी तरह सोच रहा था।
"और लोग?"
रेयांश ने पूछा।
इनाया हल्का हंसी।
"लोग temporary होते हैं।"
उस पल रेयांश को पहली बार किसी की बात दिल तक लगी।
उसने देखा...
इनाया के हाथ हल्का कांप रहे थे।
जैसे वो अंदर से डरी हुई हो।
"तुम ठीक हो?" उसने पूछा।
इनाया कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली—
"अगर मैं हां बोलूं...
तो क्या तुम मान जाओगे?"
रेयांश के पास जवाब नहीं था।
बारिश रुक चुकी थी।
लेकिन दोनों के अंदर जो तूफान चल रहा था...
वो अभी शुरू हुआ था।
उस रात दोनों साथ coffee shop से बाहर निकले।
सड़क खाली थी।
ठंडी हवा चल रही थी।
इनाया अचानक रेयांश के करीब आई।
इतना करीब...
कि उसकी सांसें महसूस होने लगीं।
और फिर उसने धीरे से कहा—
"तुम्हारी आंखें...
किसी ऐसे इंसान जैसी हैं...
जिसने प्यार में सब कुछ खो दिया हो।"
रेयांश पहली बार अंदर से हिल गया।
क्योंकि ये सच था।
बहुत बड़ा सच।
लेकिन इनाया को ये कैसे पता था...
उस रात के बाद...
रेयांश की जिंदगी बदलने वाली थी।
क्योंकि जिसे वो पहली मुलाकात समझ रहा था...
असल में वो उनकी कहानी का अंत था।
अध्याय 2
अगली रात...
रेयांश फिर उसी coffee shop के बाहर खड़ा था।
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि वो यहां क्यों आया है।
शायद इनाया की आंखें...
या उसकी बातें...
उसके दिमाग में अटक गई थीं।
बारिश आज भी हो रही थी।
लेकिन आज coffee shop खाली थी।
सिर्फ एक corner table पर इनाया बैठी थी।
जैसे उसे पहले से पता था कि रेयांश आने वाला है।
रेयांश धीरे-धीरे उसके सामने जाकर बैठ गया।
इनाया बिना उसकी तरफ देखे मुस्कुराई।
"तुम फिर आ गए।"
रेयांश ने cold आवाज में कहा—
"तुम भी तो यहीं हो।"
इनाया हल्का हंसी।
उसकी हंसी खूबसूरत थी...
लेकिन उसमें खुशी नहीं थी।
कुछ लोग दर्द छुपाने के लिए मुस्कुराते हैं...
और इनाया उन्हीं में से थी।
Waiter coffee रखकर चला गया।
कुछ देर दोनों चुप बैठे रहे।
लेकिन वो awkward silence नहीं थी...
ऐसा लग रहा था जैसे दोनों एक-दूसरे की खामोशी समझते हों।
"तुम हर रात यहां क्यों आती हो?"
रेयांश ने पूछा।
इनाया ने बाहर बारिश देखते हुए जवाब दिया—
"क्योंकि रात में लोग कम होते हैं...
और अकेलापन ज्यादा सच लगता है।"
रेयांश उसकी बातें सुनता रहा।
वो लड़की अजीब थी।
बहुत अजीब।
ऐसा लग रहा था जैसे वो हर उस feeling को जानती हो...
जिसे रेयांश सालों से छुपाता आया था।
अचानक इनाया ने पूछा—
"तुम अब भी उससे प्यार करते हो?"
रेयांश का दिल एक सेकंड के लिए रुक गया।
उसकी आंखें सीधी इनाया पर टिक गईं।
"किससे?"
इनाया धीरे से बोली—
"जिसने तुम्हें अंदर से खत्म कर दिया।"
Coffee cup रेयांश के हाथ से लगभग छूट गया।
उसने ये बात कभी किसी को नहीं बताई थी।
कभी नहीं।
फिर भी...
इनाया को कैसे पता था?
"तुम मुझे जानती भी नहीं हो।"
रेयांश की आवाज इस बार थोड़ी भारी थी।
इनाया उसकी तरफ देखने लगी।
उसकी आंखों में अजीब सी नमी थी।
"कुछ लोग पहली मुलाकात में भी अपने लगते हैं..."
फिर वो धीरे से बोली—
"और कुछ लोग...
बहुत पहले से हमारे अंदर रह रहे होते हैं।"
रेयांश कुछ समझ नहीं पा रहा था।
लेकिन वो उसके पास से उठ भी नहीं पा रहा था।
उस लड़की में कुछ था...
कुछ ऐसा जो उसे खींच रहा था।
बाहर बिजली चमकी।
उस पल अचानक इनाया डरकर थोड़ा रेयांश के करीब आ गई।
उसकी उंगलियां हल्के से रेयांश के हाथ को छू गईं।
और दोनों कुछ सेकंड वैसे ही बैठे रहे।
रेयांश ने पहली बार किसी के touch में सुकून महसूस किया था।
लेकिन उसी पल...
उसकी नजर इनाया की कलाई पर गई।
वहां छोटे-छोटे कट marks थे।
पुराने जख्म।
रेयांश की आंखें बदल गईं।
"ये किसने किया?"
इनाया तुरंत अपना हाथ पीछे कर गई।
उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी।
"कुछ दर्द...
दूसरे नहीं देते।"
उसकी आवाज कांप रही थी।
रेयांश पहली बार genuinely परेशान हुआ।
क्योंकि वो खुद उस दर्द से गुजर चुका था...
जहां इंसान खुद को खत्म करने लगता है।
कुछ देर बाद दोनों coffee shop से बाहर निकले।
रात और भी ज्यादा ठंडी हो चुकी थी।
इनाया धीरे-धीरे सड़क पर चल रही थी।
फिर अचानक वो रुकी।
और बिना उसकी तरफ देखे बोली—
"अगर एक दिन मैं अचानक गायब हो जाऊं...
तो क्या तुम मुझे ढूंढोगे?"
रेयांश ने बिना सोचे जवाब दिया—
"हां।"
इनाया की आंखें भर आईं।
लेकिन उसने आंसू गिरने नहीं दिए।
वो बस हल्का सा मुस्कुराई।
"मत ढूंढना..."
रेयांश कुछ बोल पाता...
उससे पहले एक black car उनके सामने आकर रुकी।
इनाया का चेहरा अचानक डर से सफेद पड़ गया।
उसकी सांसें तेज होने लगीं।
Car का door खुला।
अंदर से एक आदमी बाहर निकला।
Black suit...
खतरनाक आंखें...
और चेहरे पर गुस्सा।
उसने इनाया का हाथ जोर से पकड़ लिया।
"घर चलो। अभी।"
रेयांश तुरंत आगे आया।
"हाथ छोड़ उसका।"
उस आदमी ने रेयांश को ऊपर से नीचे तक देखा...
और हल्का सा हंसा।
"तुझे पता भी है ये लड़की कौन है?"
इनाया की आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।
लेकिन सबसे ज्यादा डराने वाली बात ये थी...
कि वो आदमी कोई stranger नहीं था।
वो इनाया का fiancé
अध्याय 3
बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
सड़क पर खड़ी black car की headlights सीधे रेयांश और इनाया के चेहरे पर पड़ रही थीं।
इनाया चुप थी।
इतनी चुप...
जैसे उसकी आवाज किसी ने छीन ली हो।
उस आदमी ने इनाया का हाथ और कसकर पकड़ा।
"मैं काफी देर से call कर रहा हूं।"
उसकी आवाज में गुस्सा कम...
control ज्यादा था।
रेयांश को वो आदमी बिल्कुल पसंद नहीं आया।
उसकी आंखों में प्यार नहीं था...
सिर्फ मालिकाना हक था।
"छोड़ो उसे। दर्द हो रहा है।"
रेयांश ने फिर कहा।
उस आदमी ने हल्का smirk किया।
"और तुम कौन हो?"
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर रेयांश बोला—
"कोई ऐसा...
जो इसे रोते हुए नहीं देख सकता।"
इनाया ने पहली बार उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में हल्की नमी थी।
शायद बहुत समय बाद किसी ने उसके लिए आवाज उठाई थी।
लेकिन तभी वो आदमी इनाया के करीब झुका और धीरे से बोला—
"घर जाकर बात करेंगे।"
उस एक लाइन ने इनाया के चेहरे का रंग उड़ा दिया।
रेयांश सब समझ गया।
ये रिश्ता normal नहीं था।
ये वो रिश्ता था...
जहां इंसान प्यार नहीं...
डर में जीता है।
अगले ही पल इनाया ने खुद अपना हाथ छुड़ाया।
और जबरदस्ती मुस्कुराते हुए बोली—
"मैं ठीक हूं।"
लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं।
रेयांश धीरे से उसके पास आया।
"अगर नहीं रहना चाहती...
तो मत जाओ।"
इनाया की सांसें अटक गईं।
कुछ सेकंड के लिए ऐसा लगा जैसे वो सच में रुक जाएगी।
लेकिन फिर उसने नजरें झुका लीं।
"हर किसी को अपनी जिंदगी खुद नहीं चुनने मिलती..."
उसकी आवाज टूट चुकी थी।
वो car की तरफ बढ़ गई।
Door बंद होने से पहले उसने एक आखिरी बार रेयांश की तरफ देखा।
वही उदास आंखें...
वही खामोश चीख।
और फिर car चली गई।
रेयांश काफी देर तक वहीं खड़ा रहा।
बारिश उसके कपड़े भिगो रही थी...
लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ इनाया थी।
उसकी कांपती आवाज...
उसके हाथों के जख्म...
और वो डर।
उस रात रेयांश घर नहीं गया।
वो अपनी bike लेकर पूरे शहर में घूमता रहा।
क्यों?
शायद पहली बार उसे किसी की फिक्र हुई थी।
या शायद...
वो खुद को इनाया में देखने लगा था।
सुबह लगभग 4 बजे वो अपनी apartment building पहुंचा।
कमरा हमेशा की तरह अंधेरा था।
टेबल पर दवाइयां पड़ी थीं।
खाली शराब की bottles...
और एक पुरानी फोटो frame।
रेयांश ने वो frame उठाया।
उसमें एक लड़की थी।
खूबसूरत मुस्कान...
छोटी आंखें...
और चेहरे पर मासूमियत।
रेयांश की उंगलियां हल्का कांपीं।
उसने फोटो को उल्टा करके रख दिया।
जैसे वो अतीत को फिर से देखना नहीं चाहता था।
लेकिन आज...
इनाया ने सब वापस जगा दिया था।
उसी वक्त उसका phone vibrate हुआ।
Unknown Number।
कुछ सेकंड वो screen देखता रहा।
फिर call उठाई।
दूसरी तरफ सिर्फ सांसों की आवाज थी।
और फिर...
धीमी, कांपती हुई आवाज—
"रेयांश..."
वो इनाया थी।
लेकिन वो रो रही थी।
"Please...
मुझे यहां से ले जाओ।"
रेयांश तुरंत सीधा खड़ा हो गया।
"क्या हुआ?"
अचानक दूसरी तरफ किसी चीज के टूटने की आवाज आई।
फिर किसी आदमी की तेज चीख।
इनाया डर गई।
उसकी सांसें तेजी से चलने लगीं।
"वो मुझे कभी नहीं छोड़ेगा..."
रेयांश का खून खौल उठा।
"Location भेजो। अभी।"
कुछ सेकंड बाद message आया।
एक बड़ा farmhouse...
शहर से दूर।
रेयांश बिना एक पल गंवाए बाहर भागा।
उसने bike start की।
तेज बारिश...
खाली सड़क...
और उसके अंदर अजीब सा डर।
क्योंकि उसे लग रहा था...
आज रात कुछ बहुत बुरा होने वाला है।
अध्याय 4
रेयांश की bike बारिश को चीरती हुई तेज रफ्तार में farmhouse की तरफ बढ़ रही थी।
उसके दिमाग में सिर्फ एक ही आवाज घूम रही थी—
“Please... मुझे यहां से ले जाओ...”
इनाया सच में डरी हुई थी।
और ये बात रेयांश को अंदर से बेचैन कर रही थी।
करीब 30 मिनट बाद वो farmhouse पहुंचा।
जगह शहर से बहुत दूर थी।
चारों तरफ अंधेरा...
ऊंची दीवारें...
और अंदर जलती हल्की पीली lights।
वो जगह किसी घर से ज्यादा...
कैदखाना लग रही थी।
रेयांश gate कूदकर अंदर गया।
बारिश अब भी लगातार हो रही थी।
तभी अंदर से किसी चीज के गिरने की आवाज आई।
फिर...
इनाया की चीख।
रेयांश बिना सोचे अंदर भागा।
Drawing room का दृश्य देखकर उसकी आंखें ठंडी पड़ गईं।
Floor पर टूटा glass फैला हुआ था।
इनाया जमीन पर गिरी हुई थी।
उसके होंठ के पास हल्का खून था।
और सामने वही आदमी खड़ा था।
उसका fiancé।
उसकी आंखों में गुस्सा नहीं...
पागलपन था।
“मैंने कहा था ना...
मुझे धोखा मत देना।”
उसने इनाया का हाथ जोर से पकड़ लिया।
इनाया दर्द से कांप उठी।
बस वहीं रेयांश का control खत्म हो गया।
उसने पीछे से जाकर उस आदमी को जोर से धक्का दिया।
वो सीधे table से टकराया।
“उसको हाथ मत लगाना।”
रेयांश की आवाज पहली बार इतनी खतरनाक लगी थी।
वो आदमी गुस्से से उठा।
“तुझे पता नहीं तू किससे लड़ रहा है।”
“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
दोनों की आंखें एक-दूसरे पर टिक गईं।
कमरे में सिर्फ बारिश और भारी सांसों की आवाज थी।
अचानक उस आदमी ने punch मारा।
लेकिन रेयांश ने उसका हाथ पकड़ लिया।
और अगले ही पल जोरदार मुक्का उसके चेहरे पर दे मारा।
वो आदमी नीचे गिर पड़ा।
इनाया डर गई।
“रेयांश बस... please...”
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
सालों से दबा गुस्सा...
दर्द...
नफरत...
सब बाहर आने लगा था।
वो आदमी फिर उठा और पास पड़ा glass उठाने लगा।
लेकिन उससे पहले रेयांश ने उसका collar पकड़कर दीवार पर दे मारा।
“तू प्यार के लायक नहीं है।”
उस आदमी ने खून थूकते हुए हंसी।
फिर बोला—
“और तू है?”
रेयांश रुक गया।
उस आदमी की मुस्कान और खतरनाक हो गई।
“तुझे लगता है तू इसे बचा लेगा?”
उसने धीरे से इनाया की तरफ देखा।
“इस लड़की के साथ जो भी जुड़ता है...
बर्बाद हो जाता है।”
इनाया की आंखें भर आईं।
“बस करो...”
लेकिन वो आदमी चिल्लाया—
“तुम्हें लगता है ये तुमसे प्यार करेगी?”
फिर वो रेयांश के बिल्कुल करीब आकर बोला—
“इसे पहले भी किसी से प्यार हुआ था।”
रेयांश की आंखें सिकुड़ गईं।
“और वो लड़का...”
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर वो हंसा।
“मर गया।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
इनाया रोने लगी।
“चुप हो जाओ प्लीज...”
लेकिन अब रेयांश के दिमाग में सिर्फ वही लाइन घूम रही थी।
मर गया।
कैसे?
क्यों?
तभी अचानक बाहर बिजली जोर से चमकी।
और उसी रोशनी में रेयांश ने दीवार पर लगी एक photo देखी।
उसकी सांस रुक गई।
Photo में इनाया थी...
और उसके साथ जो लड़का खड़ा था...
वो बिल्कुल रेयांश जैसा दिख रहा था।
Same eyes.
Same smile.
Same face.
रेयांश धीरे-धीरे photo के पास गया।
उसके हाथ कांप रहे थे।
“ये कौन है...?”
इनाया चुप रही।
उसकी आंखों से आंसू लगातार गिर रहे थे।
फिर उसने धीरे से कहा—
“तुम्हारा बड़ा भाई... आरव।”
अध्याय 5
कमरे में अचानक सब कुछ शांत हो गया।
रेयांश की आंखें उसी photo पर जमी थीं।
उसका बड़ा भाई...
आरव।
वही आरव जिसकी मौत को accident बताया गया था।
वही आरव...
जिसके बाद रेयांश की जिंदगी पूरी तरह बदल गई थी।
उसके हाथ कांप रहे थे।
“नहीं...”
उसकी आवाज बहुत धीमी थी।
“ये झूठ है।”
इनाया रोते हुए उसके पास आई।
लेकिन रेयांश पीछे हट गया।
उसकी आंखों में दर्द था...
और गुस्सा भी।
“तुम मेरे भाई को जानती थीं...?”
इनाया ने सिर झुका लिया।
“मैं उससे प्यार करती थी।”
ये सुनते ही रेयांश के अंदर कुछ टूट गया।
उसने दीवार पर मुक्का मार दिया।
खून उसकी उंगलियों से बहने लगा।
“तो फिर वो मरा कैसे?!”
उसकी चीख पूरे कमरे में गूंज गई।
इनाया डर गई।
उसकी सांसें कांप रही थीं।
और तभी पीछे खड़ा fiancé हंसने लगा।
धीमी...
खतरनाक हंसी।
“क्योंकि कुछ प्यार कहानियां पूरी नहीं होतीं।”
रेयांश ने उसका collar पकड़ लिया।
“सीधा बोल।”
उस आदमी की आंखों में अजीब पागलपन था।
“तेरा भाई कमजोर था।”
“चुप—”
“वो इस लड़की को बचाना चाहता था।”
इनाया जोर से रो पड़ी।
“बस करो आर्यन!”
अब पहली बार उस आदमी का नाम सामने आया।
आर्यन।
उसने रेयांश को धक्का दिया और cigarette जलाने लगा।
जैसे किसी की मौत उसके लिए मजाक हो।
“तेरा भाई बहुत hero बन रहा था...
लेकिन उसे नहीं पता था कि कुछ लोग इस दुनिया में बचाए नहीं जाते।”
रेयांश अब खुद को रोक नहीं पा रहा था।
उसकी आंखें लाल हो चुकी थीं।
“तूने क्या किया उसके साथ?”
आर्यन कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर मुस्कुराया।
“उस रात भी ऐसी ही बारिश हो रही थी।”
इनाया की हालत खराब होने लगी।
वो बार-बार सिर हिला रही थी।
“नहीं... please...”
लेकिन आर्यन रुकने वाला नहीं था।
“आरव इसे लेकर भागना चाहता था।”
रेयांश की सांसें भारी होने लगीं।
“लेकिन रास्ते में उसकी car का accident हो गया।”
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर आर्यन धीरे से बोला—
“या यूं कहो...
करवा दिया गया।”
रेयांश की आंखें फैल गईं।
इनाया वहीं जमीन पर बैठ गई।
रोते हुए।
कांपते हुए।
सालों से दबा सच आखिर बाहर आ चुका था।
रेयांश को अब सब समझ आने लगा था।
भाई की अचानक मौत...
closed case...
और उसके बाद उसका depression।
ये accident नहीं था।
ये murder था।
उसने गुस्से में आर्यन को जोर से दीवार पर दे मारा।
“मैं तुझे जान से मार दूंगा!”
लेकिन तभी—
इनाया बीच में आ गई।
“नहीं रेयांश!”
उसने रेयांश का चेहरा पकड़ लिया।
उसकी आंखों में डर साफ था।
“तुम भी उसे मार दोगे...
तो तुममें और उसमें फर्क क्या रहेगा?”
रेयांश कांप रहा था।
उसकी सांसें तेज थीं।
लेकिन इनाया का touch...
उसे धीरे-धीरे शांत कर रहा था।
कुछ सेकंड बाद उसने आर्यन को छोड़ दिया।
आर्यन नीचे गिरा...
और हंसने लगा।
“देखा?”
वो खून साफ करते हुए बोला—
“प्यार इंसान को कमजोर बना देता है।”
रेयांश अब सिर्फ इनाया को देख रहा था।
उसकी आंखों में दर्द था।
“तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया...?”
इनाया की आवाज टूट गई।
“क्योंकि मैं नहीं चाहती थी...
कि तुम भी आरव की तरह खत्म हो जाओ।”
रेयांश कुछ बोल नहीं पाया।
उस पल पहली बार उसे एहसास हुआ...
इनाया उससे दूर इसलिए नहीं जा रही थी क्योंकि वो उससे प्यार नहीं करती...
बल्कि इसलिए...
क्योंकि वो करने लगी थी।
तभी अचानक बाहर police siren की आवाज गूंजी।
आर्यन हल्का मुस्कुराया।
“Game over.”
रेयांश और इनाया दोनों चौंक गए।
Gate के बाहर police cars रुक चुकी थीं।
और अगले ही पल...
एक officer अंदर आया।
उसने सीधे रेयांश की तरफ देखा।
और बोला—
“रेयांश मल्होत्रा?”
“तुम्हें आर्यन पर हमला करने और पुराने murder case में involvement के शक में गिरफ्तार किया जाता है।”
अध्याय 6
“तुम्हें गिरफ्तार किया जाता है।”
ये शब्द सुनते ही पूरा कमरा जैसे जम गया।
रेयांश कुछ सेकंड तक सिर्फ officer को देखता रहा।
“क्या बकवास है ये?”
Officer आगे बढ़ा।
“हमें complaint मिली है कि तुमने आर्यन पर जानलेवा हमला किया है।”
पीछे खड़ा आर्यन हल्का मुस्कुरा रहा था।
जैसे ये सब पहले से plan हो।
रेयांश समझ गया...
ये trap था।
लेकिन तभी officer ने अगली लाइन कही—
“और तुम्हारा नाम आरव मल्होत्रा death case में भी सामने आया है।”
इनाया की आंखें फैल गईं।
“क्या?!”
रेयांश का चेहरा ठंडा पड़ गया।
“मैं अपने भाई को क्यों मारूंगा?”
Officer ने pocket से एक पुरानी chain निकाली।
Silver chain।
उस पर “R” लिखा हुआ था।
रेयांश की सांस रुक गई।
ये chain आरव हमेशा पहनता था।
Officer बोला—
“ये chain accident site के पास मिली थी...
लेकिन case file से गायब थी।”
आर्यन धीरे-धीरे पास आया।
“अब समझ आया?
कुछ सच इतने पुराने होते हैं...
कि लोग खुद ही villain लगने लगते हैं।”
रेयांश अब अपना control खोने लगा था।
लेकिन तभी—
इनाया अचानक officer के सामने आ गई।
“ये झूठ है!”
उसकी आवाज कांप रही थी।
“रेयांश ऐसा नहीं कर सकता!”
Officer ने सख्त नजरों से पूछा—
“तो फिर सच क्या है?”
कमरे में खामोशी फैल गई।
इनाया कुछ बोल नहीं पा रही थी।
उसकी आंखों में डर था।
बहुत गहरा डर।
रेयांश ने पहली बार notice किया...
वो किसी बात से बुरी तरह टूट रही थी।
जैसे उसके अंदर कोई और सच दबा हो।
तभी officer ने कहा—
“Miss Inaya...
आपको station चलकर statement देना होगा।”
इनाया पीछे हट गई।
“नहीं...”
उसकी सांसें अचानक तेज होने लगीं।
रेयांश तुरंत उसके पास गया।
“इनाया... hey... breathe...”
लेकिन वो कांप रही थी।
उसकी आंखों से लगातार आंसू गिर रहे थे।
फिर अचानक उसने रेयांश का हाथ पकड़ लिया।
बहुत कसकर।
और धीरे से बोली—
“अगर मैं सच बता दूं...
तो तुम मुझसे नफरत करोगे।”
रेयांश कुछ समझ नहीं पाया।
“कौन सा सच?”
इनाया की आंखें भर आईं।
“उस रात...”
उसकी आवाज टूट रही थी।
“आरव की car में मैं भी थी।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
रेयांश की आंखें धीरे-धीरे फैलने लगीं।
“क्या...?”
आर्यन मुस्कुराने लगा।
जैसे उसे इसी पल का इंतजार था।
इनाया रोते हुए बोलती गई—
“हम भाग रहे थे...
बहुत दूर जाने वाले थे...”
उसकी सांसें टूट रही थीं।
“लेकिन रास्ते में कुछ लोगों ने हमारी car को घेर लिया...”
रेयांश ध्यान से सुन रहा था।
हर शब्द उसके दिल में उतर रहा था।
“आरव मुझे बचाने की कोशिश कर रहा था...
लेकिन—”
उसने रोते हुए आंखें बंद कर लीं।
“Accident से पहले...
उसने मुझे car से धक्का दे दिया था।”
रेयांश के हाथ धीरे-धीरे ढीले पड़ गए।
उसका भाई...
आखिरी पल तक इनाया को बचा रहा था।
लेकिन twist अभी बाकी था।
इनाया ने कांपती आवाज में अगली बात कही—
“और car को hit करने वाली दूसरी गाड़ी...”
वो धीरे-धीरे रेयांश की तरफ देखने लगी।
उसकी आंखों में दर्द था।
टूटा हुआ डर।
“...तुम चला रहे थे।”
पूरा कमरा खामोश हो गया।
रेयांश का दिमाग सुन पड़ गया।
“न... नहीं...”
उसकी सांसें भारी होने लगीं।
उसकी आंखों के सामने अचानक कुछ flashes आने लगे—
बारिश...
तेज headlights...
brake की चीखती आवाज...
और सड़क पर गिरा खून।
उसने अपना सिर पकड़ लिया।
“ये झूठ है... मुझे कुछ याद नहीं...”
Officer धीरे से बोला—
“Accident के बाद तुम्हारी memory partially चली गई थी।”
आर्यन मुस्कुराया।
“Funny ना?”
फिर वो रेयांश के कान के पास आकर फुसफुसाया—
“जिसे तू सालों से इंसाफ दिलाना चाहता था...
असल में उसका killer तू खुद निकला।”
रेयांश वहीं घुटनों पर बैठ गया।
उसकी आंखें खाली हो चुकी थीं।
और सामने खड़ी इनाया...
उसे देख रही थी।
प्यार से नहीं।
दर्द से।
अध्याय 7
रेयांश जमीन पर बैठा था।
उसके कानों में सिर्फ एक ही आवाज गूंज रही थी—
“उस car को तुम चला रहे थे...”
उसकी सांसें बिखर चुकी थीं।
दिमाग बार-बार वही scene दिखा रहा था।
बारिश…
सड़क…
चीख…
और जलती हुई car।
“नहीं…”
उसने दोनों हाथों से सिर पकड़ लिया।
“मैं ऐसा नहीं कर सकता…”
लेकिन अंदर कहीं न कहीं…
उसे भी लगने लगा था कि ये सच हो सकता है।
क्योंकि accident वाली रात के बाद उसे बहुत कुछ याद ही नहीं था।
Police officers उसे देख रहे थे।
आर्यन मुस्कुरा रहा था।
और इनाया…
वो बस रो रही थी।
तभी रेयांश धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसकी आंखें लाल थीं।
लेकिन इस बार उनमें गुस्सा नहीं…
टूटन थी।
उसने सीधे इनाया की तरफ देखा।
“तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया…?”
इनाया की आवाज कांप गई।
“मैं हर दिन बताना चाहती थी…”
उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे।
“लेकिन मैं डर गई थी।”
“किससे?”
“तुम्हें खोने से।”
रेयांश चुप हो गया।
उस पल दोनों के बीच सिर्फ दर्द बचा था।
तभी अचानक officer का phone बजा।
उसने call उठाई।
कुछ सेकंड बाद उसका चेहरा बदल गया।
“क्या…?”
सभी उसकी तरफ देखने लगे।
Officer ने धीरे से कहा—
“Hospital से खबर आई है…”
“आरव जिंदा है।”
पूरा कमरा जम गया।
रेयांश की आंखें फैल गईं।
“WHAT?”
आर्यन पहली बार घबराया।
“Impossible…”
Officer ने आगे कहा—
“वो पिछले 5 साल से coma में था।
Fake identity पर उसे दूसरे शहर के private hospital में रखा गया था।”
इनाया का शरीर कांप उठा।
“नहीं… ये नहीं हो सकता…”
लेकिन सबसे ज्यादा shock रेयांश को लगा था।
उसका भाई…
जिंदा था।
मतलब…
इतने सालों से किसी ने सच छुपाया था।
और फिर सबकी नजर धीरे-धीरे आर्यन पर गई।
उसके चेहरे से पहली बार confidence गायब हुआ।
रेयांश उसकी तरफ बढ़ा।
“तूने किया ये सब?”
आर्यन पीछे हटने लगा।
लेकिन इस बार उसकी आंखों में डर था।
“तुम लोग समझ नहीं रहे…”
“तो समझा।”
रेयांश की आवाज बेहद ठंडी थी।
आर्यन कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर हंस पड़ा।
पागलों जैसी हंसी।
“क्योंकि इनाया मेरी थी!”
उसकी चीख पूरे कमरे में गूंजी।
“मैंने उसे बचपन से चाहा था!
लेकिन वो हमेशा आरव को देखती थी!”
इनाया डरकर पीछे हट गई।
“आर्यन…”
“मैंने सिर्फ उन्हें अलग करना चाहा था!”
उसकी आंखों में पागलपन साफ था।
“लेकिन accident इतना बड़ा हो जाएगा…
ये मैंने भी नहीं सोचा था…”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
अब सब साफ होने लगा था।
आर्यन ने पीछा करवाया…
car hit हुई…
और blame रेयांश पर चला गया।
लेकिन तभी—
इनाया अचानक जमीन पर गिर गई।
“इनाया!”
रेयांश तुरंत उसकी तरफ भागा।
उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं।
शायद stress…
या panic attack।
रेयांश ने उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया।
पहली बार उसका cold चेहरा पूरी तरह टूट चुका था।
“कुछ नहीं होगा… सुन रही हो ना?”
इनाया मुश्किल से मुस्कुराई।
“तुम… अब भी मेरी चिंता कर रहे हो?”
रेयांश की आंखें भर आईं।
“पागल लड़की…”
उसने धीरे से उसका माथा अपने सीने से लगा लिया।
“तुमसे नफरत करना आता ही नहीं मुझे।”
इनाया रो पड़ी।
और उसी पल…
बाहर सुबह होने लगी।
बारिश रुक चुकी थी।
लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा तूफान अभी बाकी था।
क्योंकि hospital से एक और खबर आने वाली थी…
जो सब कुछ बदल देती।
अध्याय 8
सुबह के करीब 6 बजे।
City Hospital के बाहर police cars खड़ी थीं।
रेयांश पूरी रात नहीं सोया था।
उसकी आंखें लाल थीं…
लेकिन उसका ध्यान सिर्फ ICU के दरवाजे पर था।
इनाया उसके पास बैठी थी।
दोनों के बीच अब खामोशी थी…
लेकिन वो पहले जैसी अजनबी खामोशी नहीं थी।
अब दोनों एक-दूसरे का दर्द जानते थे।
Doctor बाहर आया।
“Patient को थोड़ी देर के लिए होश आया था।”
रेयांश तुरंत खड़ा हो गया।
“भाई ठीक है ना?”
Doctor कुछ सेकंड चुप रहा।
“Condition stable है…
लेकिन mentally बहुत weak हैं।”
फिर doctor ने धीरे से कहा—
“होश आते ही उन्होंने एक नाम लिया।”
रेयांश की सांसें रुक गईं।
“कौन सा नाम?”
Doctor ने इनाया की तरफ देखा।
“Inaya.”
इनाया की आंखें भर आईं।
उसके हाथ कांपने लगे।
इतने साल…
इतने साल बाद भी आरव ने सबसे पहले उसी को याद किया।
रेयांश ने उसकी तरफ देखा।
और पहली बार उसके दिल में जलन नहीं हुई।
बस दर्द हुआ।
क्योंकि अब उसे समझ आने लगा था…
इनाया सिर्फ उसकी नहीं थी।
वो किसी अधूरी कहानी का हिस्सा थी।
कुछ देर बाद doctor ने सिर्फ एक इंसान को अंदर जाने की permission दी।
और आरव ने…
इनाया को बुलाया।
ICU के अंदर हल्की machines की आवाज गूंज रही थी।
आरव बहुत कमजोर दिख रहा था।
चेहरे पर oxygen mask…
और शरीर पर कई wires।
लेकिन उसकी आंखें खुली थीं।
इनाया धीरे-धीरे उसके पास गई।
उसे देखकर आरव की आंखों में आंसू आ गए।
“तुम… जिंदा हो…”
उसकी आवाज बहुत धीमी थी।
इनाया खुद को रोक नहीं पाई।
वो रोते हुए उसके पास बैठ गई।
“मुझे लगा मैं तुम्हें खो चुकी हूं…”
आरव हल्का मुस्कुराया।
“मैंने भी…”
दोनों कुछ सेकंड सिर्फ एक-दूसरे को देखते रहे।
वो प्यार अभी भी जिंदा था।
कमजोर…
टूटा हुआ…
लेकिन जिंदा।
तभी आरव ने धीरे से पूछा—
“रेयांश… ठीक है?”
इनाया चौंक गई।
इतने साल coma में रहने के बाद भी…
उसे अपने छोटे भाई की फिक्र थी।
“हां… वो बाहर है।”
आरव ने आंखें बंद कीं।
“उससे कहना…
उसकी गलती नहीं थी।”
बाहर खड़ा रेयांश सब सुन चुका था।
उसकी आंखें भर आईं।
वो खुद को सालों से killer समझता रहा…
लेकिन उसका भाई उसे पहले ही माफ कर चुका था।
तभी ICU के अंदर अचानक machine की आवाज तेज होने लगी।
Doctor भागकर अंदर आए।
“Heart rate dropping!”
इनाया डर गई।
“आरव!”
रेयांश भी अंदर भागा।
लेकिन उसी पल…
आरव ने बड़ी मुश्किल से हाथ उठाया।
और रेयांश का हाथ पकड़ लिया।
उसकी आंखों में दर्द था…
लेकिन प्यार भी।
फिर उसने बहुत मुश्किल से कहा—
“इनाया को… अकेला मत छोड़ना…”
बीप————
Machine की सीधी आवाज पूरे कमरे में गूंज गई।
इनाया की चीख निकल गई।
“आरव!!”
रेयांश वहीं जम गया।
उसके हाथ में अभी भी अपने भाई का ठंडा होता हाथ था।
और उसी पल…
उसे पहली बार एहसास हुआ।
कुछ लोग जिंदगी में देर से नहीं आते…
बल्कि गलत समय पर आ जाते हैं।
अध्याय 9
आरव की मौत के बाद…
सब कुछ बदल गया।
Hospital की सफेद दीवारें…
रोती हुई इनाया…
और रेयांश की खामोशी।
सब कुछ भारी हो चुका था।
Final rites के दौरान रेयांश पूरे समय चुप खड़ा रहा।
ना आंसू…
ना आवाज।
लेकिन अंदर से वो पूरी तरह टूट चुका था।
क्योंकि इस बार उसने अपने भाई को सच में खो दिया था।
और सबसे ज्यादा दर्द इस बात का था…
कि आखिरी पल में भी आरव ने इनाया का नाम लिया।
उस रात रेयांश अकेला अपने apartment लौटा।
कमरा पहले से ज्यादा खाली लग रहा था।
टेबल पर वही पुरानी photo पड़ी थी।
इस बार उसने photo को उल्टा नहीं किया।
वो देर तक उसे देखता रहा।
फिर धीरे से बोला—
“Sorry भाई…”
उसकी आंखों से पहली बार आंसू गिरे।
लेकिन उसी पल…
उसे एहसास हुआ कि इनाया पूरे दिन से कहीं दिखाई नहीं दी।
उसने तुरंत phone निकाला।
Call किया।
Switched off.
एक बार…
दो बार…
दस बार।
लेकिन कोई जवाब नहीं।
रेयांश का दिल तेजी से धड़कने लगा।
अचानक उसे डर महसूस हुआ।
वही डर…
जो उसने उस पहली बारिश वाली रात महसूस किया था।
उसने तुरंत bike उठाई और सीधे इनाया के घर पहुंचा।
लेकिन वहां ताला लगा था।
पड़ोस वाली aunty ने बताया—
“वो लड़की तो सुबह ही कहीं चली गई।”
रेयांश का चेहरा उतर गया।
“कहां?”
“पता नहीं बेटा…
लेकिन जाते वक्त बहुत रो रही थी।”
उस रात रेयांश ने पूरा शहर ढूंढ डाला।
Railway station…
Bus stand…
पुरानी coffee shop…
हर जगह।
लेकिन इनाया नहीं मिली।
जैसे वो हवा में गायब हो गई हो।
सुबह होने लगी।
थका हुआ रेयांश आखिर उसी coffee shop पहुंचा…
जहां ये सब शुरू हुआ था।
वही window seat।
वही बारिश की खुशबू।
और वहीं table पर एक folded letter रखा था।
उसका नाम लिखा था—
“रेयांश”
उसके हाथ कांप गए।
उसने जल्दी से letter खोला।
अंदर इनाया की handwriting थी।
“रेयांश…
अगर तुम ये पढ़ रहे हो,
तो मैं जा चुकी हूं।
मुझे पता है तुम मुझे ढूंढोगे…
क्योंकि तुम हमेशा उन लोगों को बचाना चाहते हो जिन्हें तुम प्यार करते हो।
लेकिन इस बार मुझे मत ढूंढना।
आरव की मौत के बाद मैं तुम्हारी आंखों में रोज दर्द देखूंगी…
और शायद खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी।
मैं तुमसे दूर इसलिए नहीं जा रही क्योंकि मैं तुमसे प्यार नहीं करती…
बल्कि इसलिए…
क्योंकि मैं बहुत ज्यादा करने लगी हूं।
और हमारी कहानी का यही सबसे खराब हिस्सा है।
हम दोनों एक-दूसरे के लिए सही थे…
लेकिन सही समय पर नहीं मिले।
तुम्हारी जिंदगी में पहले ही बहुत अंधेरा है।
मैं और नहीं बनना चाहती।
— इनाया”
Letter पढ़ते-पढ़ते रेयांश की आंखें भर गईं।
उसने तुरंत पीछे देखा।
जैसे उम्मीद हो कि इनाया वहीं खड़ी मिलेगी।
लेकिन वहां सिर्फ खाली chair थी।
और बाहर…
बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
तभी coffee shop owner उसके पास आया।
“वो लड़की जाते वक्त ये भी छोड़ गई थी।”
उसने एक छोटी silver ring रेयांश के हाथ में रखी।
अंदर लिखा था—
“Until my last breath.”
रेयांश की सांस अटक गई।
क्योंकि यही line…
आरव हमेशा इनाया से कहा करता था।
उस पल पहली बार रेयांश को एहसास हुआ…
वो सिर्फ अपने भाई की love story का हिस्सा नहीं बना था।
वो उसी अधूरी कहानी से प्यार कर बैठा था।
अध्याय 10
तीन महीने बाद…
शहर में सर्दियां शुरू हो चुकी थीं।
रेयांश अब पहले जैसा नहीं रहा था।
वो अब भी कम बोलता था…
लेकिन उसकी आंखों में पहले जैसी नफरत नहीं थी।
उसने शराब छोड़ दी थी।
Late night fights छोड़ दी थीं।
और सबसे बड़ी बात…
उसने खुद को सजा देना छोड़ दिया था।
लेकिन एक चीज अब भी नहीं बदली थी।
हर रात…
वो उसी coffee shop में जाता था।
वही corner table।
वही black coffee।
और वही इंतजार।
शायद उसे खुद भी नहीं पता था कि वो किस उम्मीद में वहां आता है।
लेकिन दिल अभी भी इनाया को ढूंढता था।
उस रात भी बाहर हल्की बारिश हो रही थी।
रेयांश window के पास बैठा था।
उसकी उंगलियां अब भी उस silver ring को पकड़े हुए थीं।
“Until my last breath…”
वो धीरे से मुस्कुराया।
“पागल लड़की…”
तभी coffee shop का door खुला।
ठंडी हवा अंदर आई।
और उसके साथ…
वो।
रेयांश की सांस रुक गई।
सफेद sweater…
हल्की भीगी हुई आंखें…
और वही खामोश मुस्कान।
इनाया।
कुछ सेकंड दोनों सिर्फ एक-दूसरे को देखते रहे।
जैसे समय वहीं रुक गया हो।
रेयांश धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसे यकीन ही नहीं हो रहा था।
“तुम…”
इनाया की आंखें भर आईं।
“मैं कोशिश कर रही थी दूर रहने की…”
वो हल्का हंसी।
“लेकिन तुमसे ज्यादा stubborn मेरा दिल निकला।”
रेयांश उसके करीब आया।
इस बार बिना डर के।
बिना गुस्से के।
“फिर गई क्यों थी?”
इनाया की नजरें झुक गईं।
“क्योंकि मुझे लगा…
मैं तुम्हें सिर्फ दर्द दूंगी।”
“और अब?”
इनाया ने धीरे से उसकी तरफ देखा।
“अब समझ आया…
कि कुछ लोग दर्द नहीं…
घर जैसे लगते हैं।”
रेयांश की आंखें भर गईं।
इतने महीनों का अकेलापन…
दर्द…
गुस्सा…
सब उस एक पल में टूट गया।
वो धीरे से उसके बिल्कुल करीब आया।
इतना करीब…
कि दोनों की सांसें टकराने लगीं।
“इस बार भागोगी तो नहीं?”
इनाया हल्का मुस्कुराई।
“अगर तुम रोक लोगे…
तो नहीं।”
और अगले ही पल…
रेयांश ने उसे अपनी बाहों में खींच लिया।
जोर से।
जैसे इस बार वो उसे कभी खोना नहीं चाहता।
इनाया उसकी chest से लगकर रो पड़ी।
लेकिन ये आंसू दर्द के नहीं थे।
सुकून के थे।
Coffee shop की lights…
बाहर गिरती बारिश…
और अंदर दो टूटे हुए लोग…
जो आखिरकार एक-दूसरे में अपना घर ढूंढ चुके थे।
कुछ देर बाद इनाया ने धीरे से कहा—
“आरव नाराज़ तो नहीं होगा…?”
रेयांश हल्का मुस्कुराया।
फिर आसमान की तरफ देखा।
“नहीं…”
उसने धीरे से इनाया का माथा चूमा।
“क्योंकि उसने जाते-जाते तुम्हें मेरे हवाले जो किया था।”
बाहर बारिश रुक चुकी थी।
और कई महीनों बाद…
रेयांश को रात खूबसूरत लग रही थी।
क्योंकि इस बार…
उसकी जिंदगी में अंधेरा नहीं,
इनाया थी।
— समाप्त —