अध्याय 1
"अगर पूरी दुनिया तुम्हें भूल जाए...
तो क्या तुम दुनिया को बदलना चाहोगे?"
उज्ज्वल ने मोबाइल स्क्रीन पर चमकते इस संदेश को देखा।
रात के 2 बजे थे।
कमरे की लाइट बंद थी और केवल मोबाइल की नीली रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी।
स्कूल में आज भी वही हुआ था।
क्लास के लड़कों ने उसका बैग छिपा दिया था।
लंच टाइम में कोई उसके साथ नहीं बैठा।
टीचर ने भी उसकी बात सुने बिना उसे डांट दिया।
उज्ज्वल को अब आदत पड़ चुकी थी।
उसके पास कोई दोस्त नहीं था।
उसकी असली दुनिया बस एक जगह खत्म होती थी...
गेम्स।
वह हर दिन घंटों तक अलग-अलग गेम खेलता था।
लेकिन आज जो नोटिफिकेशन आया था, वह किसी भी गेम जैसा नहीं था।
स्क्रीन पर फिर से वही मैसेज चमका।
"क्या तुम इस दुनिया को छोड़कर एक बेहतर दुनिया में जाना चाहते हो?"
नीचे केवल दो विकल्प थे।
YES
NO
उज्ज्वल हंसा।
"कोई नया हॉरर गेम होगा।"
उसने YES दबा दिया।
जैसे ही उसकी उंगली स्क्रीन से टकराई...
मोबाइल पूरी तरह काला हो गया।
कमरे की हवा अचानक भारी लगने लगी।
पंखा बंद हो गया।
घड़ी रुक गई।
और फिर...
सब कुछ सफेद हो गया।
...
जब उसने आंखें खोलीं...
वह अपने कमरे में नहीं था।
उसके सामने एक अनंत सफेद मैदान फैला हुआ था।
न आसमान।
न जमीन।
न दिशा।
बस सफेद।
"स्वागत है, प्लेयर 107।"
एक आवाज गूंजी।
उज्ज्वल घबरा गया।
"कौन है?"
कोई जवाब नहीं आया।
अचानक उसके सामने काले रंग का एक दरवाजा प्रकट हुआ।
दरवाजे पर केवल एक वाक्य लिखा था।
"पहला सत्य तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है।"
उज्ज्वल ने धीरे-धीरे दरवाजा खोला।
दूसरी तरफ...
उसका स्कूल था।
लेकिन कुछ अलग था।
स्कूल पूरी तरह खाली था।
एक भी इंसान नहीं।
हर क्लासरूम खुला हुआ था।
हर घड़ी एक ही समय दिखा रही थी।
11:11
उज्ज्वल ने कदम आगे बढ़ाया।
तभी उसके पीछे दरवाजा गायब हो गया।
"अब क्या करूं?"
उसने बुदबुदाया।
उसी समय पूरे स्कूल में स्पीकर चालू हो गए।
"मिशन शुरू।"
"तीन घंटे के भीतर सत्य खोजो।"
"असफलता का अर्थ है मृत्यु।"
उज्ज्वल का दिल तेजी से धड़कने लगा।
"ये मजाक है क्या?"
तभी...
कॉरिडोर के अंत में किसी के चलने की आवाज आई।
टप...
टप...
टप...
उज्ज्वल ने देखा।
दूर एक लड़का खड़ा था।
स्कूल यूनिफॉर्म में।
उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
और सबसे डरावनी बात...
वह लड़का बिल्कुल उज्ज्वल जैसा दिख रहा था।
"तुम कौन हो?"
उज्ज्वल चिल्लाया।
लड़के ने सिर उठाया।
उसके चेहरे पर आंखें नहीं थीं।
केवल काला अंधेरा।
और अगले ही पल...
वह पूरी रफ्तार से उज्ज्वल की तरफ दौड़ पड़ा।
उज्ज्वल भागा।
कॉरिडोर में उसके कदमों की आवाज गूंजने लगी।
पीछे वह चीज लगातार नजदीक आती जा रही थी।
उज्ज्वल सीढ़ियों की तरफ मुड़ा।
लेकिन जैसे ही उसने ऊपर देखा...
छत पर सफेद कोट पहने एक लड़की खड़ी थी।
वह चुपचाप उसे देख रही थी।
और पहली बार बोली।
"भागो मत।"
"तुम पहले भी यहां मर चुके हो।"
उज्ज्वल रुक गया।
"क्या?"
लेकिन लड़की गायब हो चुकी थी।
और अगले ही सेकंड...
पीछे से उस अंधेरे चेहरे वाले लड़के ने उसका गला पकड़ लिया।
दुनिया अंधेरी हो गई।
उज्ज्वल मर चुका था।
...
...
...
"अगर पूरी दुनिया तुम्हें भूल जाए...
तो क्या तुम दुनिया को बदलना चाहोगे?"
उज्ज्वल की आंख खुली।
वह फिर अपने कमरे में था।
मोबाइल स्क्रीन पर वही संदेश चमक रहा था।
लेकिन इस बार...
उसे याद था कि वह मर चुका है।
अध्याय 2
उज्ज्वल हांफते हुए बिस्तर पर उठ बैठा।
उसके हाथ कांप रहे थे।
दिल इतनी तेज धड़क रहा था जैसे अभी भी कोई उसका पीछा कर रहा हो।
मोबाइल की स्क्रीन पर वही संदेश चमक रहा था।
"क्या तुम इस दुनिया को छोड़कर एक बेहतर दुनिया में जाना चाहते हो?"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"नहीं..."
उसने फुसफुसाया।
"मैं अभी मरा था..."
उसके गले में अब भी उस दबाव का एहसास था।
लेकिन यह असंभव था।
वह फिर भी YES दबा देता है।
कुछ सेकंड बाद...
फिर वही सफेद दुनिया।
फिर वही काला दरवाजा।
फिर वही स्कूल।
लेकिन इस बार एक चीज अलग थी।
उज्ज्वल को सब याद था।
"तो सच में..."
"मैं वापस आ गया हूँ।"
स्पीकर चालू हुए।
"मिशन शुरू।"
"तीन घंटे के भीतर सत्य खोजो।"
उज्ज्वल तुरंत भागा।
उसे पता था कि कुछ ही मिनटों में वह अंधेरे चेहरे वाला लड़का दिखाई देगा।
इस बार उसने सीधे दूसरी मंजिल की ओर दौड़ लगाई।
वह उस सफेद कोट वाली लड़की को ढूंढना चाहता था।
क्योंकि मरने से पहले उसी ने कुछ कहा था।
"तुम पहले भी यहां मर चुके हो।"
दूसरी मंजिल पर पहुंचते ही...
उसे वही लड़की दिखाई दी।
वह खिड़की के पास खड़ी थी।
जैसे उसका इंतजार कर रही हो।
उज्ज्वल धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
"तुम कौन हो?"
लड़की ने उसकी ओर देखा।
उसकी आंखें अजीब थीं।
जैसे उनमें हजारों यादें कैद हों।
"तुम्हें अभी मेरा नाम जानने की अनुमति नहीं है।"
उज्ज्वल चिढ़ गया।
"अनुमति?"
"ये जगह क्या है?"
लड़की कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली।
"यह एक गेम नहीं है।"
"यह एक परीक्षा है।"
उज्ज्वल कुछ पूछ पाता उससे पहले...
पूरे स्कूल में अचानक सायरन बज उठा।
लड़की का चेहरा बदल गया।
पहली बार वह घबराई हुई लगी।
"वह आ गया।"
"कौन?"
लेकिन जवाब देने के बजाय लड़की पीछे हट गई।
और धीरे-धीरे हवा में घुलकर गायब हो गई।
उज्ज्वल अकेला रह गया।
तभी...
कॉरिडोर के दूसरे छोर पर कुछ दिखाई दिया।
वही लड़का।
बिना आंखों वाला।
बिना चेहरे वाला।
लेकिन इस बार उज्ज्वल भागा नहीं।
उसने ध्यान से देखा।
और तभी उसे एक अजीब चीज नजर आई।
उस प्राणी की छाया...
उसके शरीर से मेल नहीं खा रही थी।
छाया किसी और की थी।
किसी वयस्क इंसान की।
"ये क्या है?"
उसी क्षण उसके दिमाग में तेज दर्द हुआ।
और उसकी आंखों के सामने एक नीली स्क्रीन चमकी।
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नई क्षमता अनलॉक
Observer Lv.1
आप 3 सेकंड तक किसी वस्तु की छिपी जानकारी देख सकते हैं।
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उज्ज्वल हैरान रह गया।
"ये मेरी पावर है?"
उसने तुरंत उस प्राणी पर क्षमता इस्तेमाल की।
दुनिया कुछ सेकंड के लिए धुंधली हो गई।
फिर उसके ऊपर शब्द उभरने लगे।
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नाम: अज्ञात
स्थिति: नकली अस्तित्व
कमजोरी: सत्य
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उज्ज्वल समझ नहीं पाया।
"सत्य?"
इसका मतलब क्या था?
तभी वह प्राणी दौड़ पड़ा।
पहले से भी ज्यादा तेज।
उज्ज्वल भागा।
लेकिन इस बार उसके दिमाग में एक नई बात थी।
अगर कमजोरी "सत्य" है...
तो शायद इस स्कूल में कोई राज छिपा है।
वह सीधे प्रिंसिपल ऑफिस की ओर दौड़ा।
दरवाजा बंद था।
लेकिन जैसे ही उसने हैंडल पकड़ा...
ऑफिस अपने आप खुल गया।
अंदर एक मेज थी।
और मेज पर एक पुरानी फाइल।
फाइल के ऊपर लिखा था।
"स्टूडेंट 107"
उज्ज्वल का दिल रुक गया।
107...
वही नंबर जो सिस्टम ने उसे दिया था।
उसने कांपते हाथों से फाइल खोली।
पहले पन्ने पर एक तस्वीर थी।
उसकी खुद की।
लेकिन तस्वीर के नीचे जो लिखा था...
उसे पढ़कर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
"विषय 107
सफल रीसेट: 18 बार"
उज्ज्वल की आंखें फैल गईं।
"अठारह बार?"
"लेकिन मैं तो अभी सिर्फ एक बार मरा हूँ!"
तभी पीछे से एक आवाज आई।
"नहीं।"
"तुम उन्नीसवीं बार खेल रहे हो।"
उज्ज्वल धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।
दरवाजे पर वही लड़की खड़ी थी।
इस बार उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी।
सिर्फ दुख था।
और उसने एक ऐसा वाक्य कहा जिसने उज्ज्वल की पूरी दुनिया हिला दी।
"तुम हर बार मुझे भूल जाते हो।"
अध्याय 3
उज्ज्वल की सांसें रुक गईं।
"तुम हर बार मुझे भूल जाते हो।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
उज्ज्वल उस लड़की को घूरता रहा।
"मैं... तुम्हें जानता हूँ?"
लड़की हल्का सा मुस्कुराई।
लेकिन उस मुस्कान में खुशी नहीं थी।
सिर्फ थकान थी।
"जानते थे।"
"बहुत अच्छी तरह।"
उज्ज्वल का सिर दर्द से फटने लगा।
कुछ अजीब दृश्य उसकी आंखों के सामने चमके।
एक लंबा कॉरिडोर...
खून नहीं, बल्कि टूटी हुई घड़ियाँ...
सफेद बारिश...
और वही लड़की...
जो उसका हाथ पकड़कर कुछ कह रही थी।
लेकिन शब्द सुनाई नहीं दिए।
अगले ही पल सब गायब हो गया।
"ये क्या था?"
उज्ज्वल घुटनों पर बैठ गया।
लड़की उसकी ओर बढ़ी।
"तुम्हारी यादें वापस आना शुरू हो रही हैं।"
"लेकिन बहुत धीरे।"
उज्ज्वल ने गुस्से में पूछा,
"तुम हो कौन?"
लड़की कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली।
"मेरा नाम..."
अचानक पूरा कमरा कांप उठा।
दीवारों पर दरारें पड़ने लगीं।
जैसे किसी ने उसकी बात को रोक दिया हो।
लड़की तुरंत चुप हो गई।
"फिर से वही..."
उसने धीरे से कहा।
"क्या हुआ?"
"यह दुनिया मुझे अपना नाम बताने नहीं देती।"
उज्ज्वल कुछ समझ नहीं पाया।
लेकिन तभी उसकी नजर फाइल पर गई।
"सफल रीसेट: 18 बार"
उसका दिल फिर जोर से धड़कने लगा।
"अगर मैं 18 बार मर चुका हूँ..."
"तो मैंने गेम खत्म क्यों नहीं किया?"
लड़की का चेहरा गंभीर हो गया।
"क्योंकि हर बार अंत के करीब पहुँचकर..."
"तुम कुछ ऐसा देख लेते हो जिसे देखकर खुद ही हार मान लेते हो।"
उज्ज्वल के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
"क्या?"
लड़की जवाब देती उससे पहले...
पूरे स्कूल में अचानक अंधेरा छा गया।
सायरन बजने लगे।
वही आवाज गूंजी।
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पहला सत्य सक्रिय।
खिलाड़ी को 10 मिनट के भीतर सत्य ढूँढना होगा।
━━━━━━━━━━━━
अचानक प्रिंसिपल ऑफिस की सभी दीवारें गायब हो गईं।
उनकी जगह अनगिनत दरवाजे दिखाई देने लगे।
सैकड़ों दरवाजे।
हर दरवाजे पर एक तारीख लिखी थी।
उज्ज्वल हैरान रह गया।
2019
2020
2021
2022
...
और फिर...
एक दरवाजा।
जिस पर लिखा था।
"रीसेट 18"
लड़की का चेहरा बदल गया।
"नहीं!"
"उस दरवाजे को मत खोलना!"
लेकिन उज्ज्वल रुक नहीं पाया।
उसने दरवाजा खोल दिया।
अंदर एक कमरा था।
और उस कमरे में...
उज्ज्वल खुद बैठा था।
लेकिन उम्र में बड़ा।
लगभग 18 साल का।
उसकी आंखों के नीचे काले घेरे थे।
चेहरे पर निराशा थी।
और सामने एक वीडियो रिकॉर्ड हो रहा था।
रिकॉर्डिंग वाला उज्ज्वल सीधे उसकी तरफ देखने लगा।
जैसे वह जानता हो कि कोई उसे देख रहा है।
फिर उसने कहा—
"अगर तुम ये देख रहे हो..."
"तो इसका मतलब है कि तुम फिर हार गए।"
उज्ज्वल का पूरा शरीर जम गया।
वीडियो वाला उज्ज्वल आगे बोला।
"मेरा नाम उज्ज्वल नहीं है।"
"कम से कम अब नहीं।"
"इस दुनिया ने हमसे सब कुछ छीन लिया है।"
"और सबसे पहले हमारी पहचान।"
अचानक वीडियो रुक गया।
स्क्रीन फट गई।
कमरा कांपने लगा।
और फिर...
उस वीडियो वाले उज्ज्वल ने स्क्रीन के अंदर से अपना हाथ बाहर निकाल दिया।
उज्ज्वल पीछे हट गया।
"ये क्या है?!"
लेकिन वह चीज बाहर निकलने लगी।
धीरे-धीरे।
जैसे कोई कैदी जेल तोड़ रहा हो।
लड़की चीखी।
"भागो!"
"वो असली रीसेट नहीं था!"
"वो तुम्हारी टूटी हुई याद है!"
तभी पूरी स्क्रीन फट गई।
और 18 साल वाला उज्ज्वल बाहर आ गया।
उसने सिर उठाया।
उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं।
और उसके होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी।
"आखिरकार..."
"मैं फिर से तुमसे मिल पाया।"
उज्ज्वल पीछे हट गया।
"तुम कौन हो?"
वह मुस्कुराया।
और बोला—
"मैं तुम हूँ।"
"वो उज्ज्वल... जिसने 18वीं बार मरने के बाद वापस आने से इंकार कर दिया था।"
पूरा स्कूल हिलने लगा।
और पहली बार...
उज्ज्वल को एहसास हुआ कि इस गेम के असली दुश्मन दानव नहीं हैं।
बल्कि उसके अपने ही टूटे हुए संस्करण हैं।
और सामने खड़ा पहला दुश्मन...
खुद उज्ज्वल था।
अध्याय 4
"मैं तुम हूँ।"
यह सुनते ही उज्ज्वल के पैरों तले जमीन खिसक गई।
सामने खड़ा लड़का बिल्कुल उसी जैसा था।
लेकिन उसकी आंखों में उम्मीद नहीं थी।
सिर्फ खालीपन था।
जैसे उसने बहुत पहले हार मान ली हो।
"झूठ।"
उज्ज्वल ने पीछे हटते हुए कहा।
"तुम मैं नहीं हो सकते।"
वह हँसा।
धीमी और डरावनी हँसी।
"हर बार यही कहते हो।"
"पहली बार, पाँचवीं बार, बारहवीं बार..."
"और उन्नीसवीं बार भी।"
उज्ज्वल का सिर घूमने लगा।
उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या सच है।
तभी नीली स्क्रीन चमकी।
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विशेष घटना
"टूटा हुआ स्व"
पराजय की शर्त:
खिलाड़ी अपनी पहचान खो दे।
विजय की शर्त:
सत्य स्वीकार करो।
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"सत्य?"
उज्ज्वल बुदबुदाया।
"कौन सा सत्य?"
टूटा हुआ उज्ज्वल आगे बढ़ा।
"सत्य यह है कि तुम कभी खास नहीं थे।"
अचानक उनके आसपास की दुनिया बदल गई।
स्कूल गायब हो गया।
उसकी जगह क्लासरूम दिखाई देने लगा।
असली दुनिया वाला।
वही क्लास।
वही बच्चे।
वही हँसी।
वही ताने।
"अरे गेमर!"
"फिर अकेला बैठा है!"
"इसके पास कोई दोस्त नहीं है!"
हँसी पूरे कमरे में गूँजने लगी।
उज्ज्वल का चेहरा उतर गया।
ये उसकी सबसे बुरी यादें थीं।
टूटा हुआ उज्ज्वल उसके कान में फुसफुसाया—
"याद है?"
"जब तुमने दोस्त बनाने की कोशिश की थी?"
दृश्य बदल गया।
एक छोटा उज्ज्वल किसी लड़के के पास बैठा था।
लेकिन वह लड़का उठकर दूसरी सीट पर चला गया।
फिर सब हँसने लगे।
उज्ज्वल ने आँखें बंद कर लीं।
वह याद उसे आज भी दर्द देती थी।
"बस करो..."
उसने धीरे से कहा।
लेकिन टूटा हुआ उज्ज्वल नहीं रुका।
"याद है जब तुम्हारा जन्मदिन था?"
दूसरा दृश्य उभरा।
घर में छोटा सा केक रखा था।
उज्ज्वल पूरे दिन दोस्तों का इंतजार करता रहा।
कोई नहीं आया।
एक भी नहीं।
उसकी मुट्ठियाँ भींच गईं।
"बस करो!"
इस बार वह चिल्लाया।
पूरा संसार काँप उठा।
लेकिन टूटा हुआ उज्ज्वल मुस्कुराया।
"देखा?"
"यही कारण है कि मैं हार गया।"
"क्योंकि सच्चाई यही है।"
"हम अकेले हैं।"
"हमेशा से।"
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर अचानक...
सफेद कोट वाली लड़की सामने आ गई।
उसने पहली बार गुस्से में कहा—
"चुप रहो!"
टूटा हुआ उज्ज्वल उसकी तरफ देखने लगा।
"तुम अभी भी उसे बचाना चाहती हो?"
लड़की ने जवाब नहीं दिया।
वह सीधे उज्ज्वल की ओर मुड़ी।
"उसकी बात मत सुनो।"
"वह तुम्हारी याद है।"
"तुम्हारी सच्चाई नहीं।"
उज्ज्वल ने सिर उठाया।
"फर्क क्या है?"
लड़की कुछ पल चुप रही।
फिर बोली—
"दर्द एक घटना है।"
"लेकिन तुम कौन हो, यह तुम्हारा फैसला है।"
उज्ज्वल के अंदर कुछ हिल गया।
उसे पहली बार लगा कि शायद...
शायद वह सिर्फ अपनी असफलताओं का नाम नहीं है।
टूटा हुआ उज्ज्वल अचानक गुस्से में आ गया।
उसकी आँखों से काला धुआँ निकलने लगा।
"फिर वही!"
"हर बार तुम उसे उम्मीद देती हो!"
"और हर बार वह फिर मरता है!"
पूरा कमरा हिलने लगा।
फर्श टूटने लगा।
दीवारें बिखरने लगीं।
नीली स्क्रीन चमकी।
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Observer Lv.1 विकसित हुआ।
नई क्षमता:
Memory Trace
आप किसी याद की असली भावना देख सकते हैं।
━━━━━━━━━━━━
उज्ज्वल की आँखों में नीली चमक आई।
उसने तुरंत टूटा हुआ उज्ज्वल पर क्षमता इस्तेमाल की।
और अगले ही पल...
उसे कुछ दिखाई दिया।
टूटा हुआ उज्ज्वल रो रहा था।
अकेला।
अंधेरे में।
वह हार से नहीं टूटा था।
वह किसी को खोने से टूटा था।
किसी बहुत महत्वपूर्ण इंसान को।
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"रुको..."
"तुम अकेलेपन से नहीं टूटे थे..."
"तुम किसी को बचा नहीं पाए थे।"
पहली बार...
टूटे हुए उज्ज्वल के चेहरे का रंग उड़ गया।
उसने डरकर पीछे कदम रखा।
"नहीं..."
"तुम्हें यह नहीं पता होना चाहिए था।"
उज्ज्वल ने आगे बढ़कर कहा—
"तुम कौन थे?"
"तुमने किसे खोया था?"
अचानक पूरा संसार लाल चेतावनी से भर गया।
━━━━━━━━━━━━
प्रतिबंधित सत्य का पता चला।
सिस्टम हस्तक्षेप कर रहा है।
━━━━━━━━━━━━
सफेद कोट वाली लड़की का चेहरा पीला पड़ गया।
"उज्ज्वल!"
"अभी पीछे हटो!"
लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
पहली बार...
आसमान में एक विशाल आँख खुली।
वह किसी इंसान की नहीं थी।
और उसने सीधे उज्ज्वल की ओर देखा।
फिर एक आवाज गूँजी—
"खिलाड़ी 107 ने निर्धारित सीमा पार कर ली है।"
"निरीक्षण प्रारंभ।"
उज्ज्वल के शरीर में ठंड दौड़ गई।
क्योंकि उसे महसूस हुआ...
कि इस गेम में खिलाड़ियों से भी ऊपर कोई है।
कोई ऐसा...
जो हर रीसेट को देख रहा है।
अध्याय 5
आसमान में खुली वह विशाल आँख पूरी दुनिया पर छा गई थी।
उज्ज्वल हिल भी नहीं पा रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे उसके शरीर का नियंत्रण किसी और ने छीन लिया हो।
"निरीक्षण प्रारंभ।"
वही आवाज फिर गूंजी।
सफेद कोट वाली लड़की पहली बार डरी हुई दिखाई दी।
"नीचे मत देखना!"
वह चिल्लाई।
"उसकी आँखों में मत देखना!"
लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।
उज्ज्वल की नजर उस विशाल आँख से मिल चुकी थी।
और अगले ही पल...
उसके आसपास की दुनिया गायब हो गई।
...
वह खुद को एक अंधेरी जगह पर खड़ा पाया।
न स्कूल।
न सफेद मैदान।
न लड़की।
बस अंधेरा।
फिर उसके सामने हजारों स्क्रीन जल उठीं।
हर स्क्रीन पर एक ही व्यक्ति था।
उज्ज्वल।
लेकिन अलग-अलग उम्र का।
कहीं वह 15 साल का था।
कहीं 20 साल का।
कहीं बूढ़ा।
कहीं घायल।
कहीं मुस्कुराता हुआ।
कहीं रोता हुआ।
उज्ज्वल का दिल बैठ गया।
"ये क्या है?"
तभी एक स्क्रीन के नीचे संख्या चमकी।
21
दूसरी पर।
84
तीसरी पर।
311
फिर हजारों और।
उज्ज्वल समझ नहीं पाया।
तभी आवाज आई।
"संभावित भविष्य।"
उसकी सांस रुक गई।
"क्या?"
"तुम्हारे संभावित संस्करण।"
"तुम्हारे संभावित अंत।"
उज्ज्वल धीरे-धीरे पीछे हट गया।
इसका मतलब...
हर स्क्रीन एक ऐसा उज्ज्वल था जो अलग चुनाव कर चुका था।
कुछ सफल हुए थे।
कुछ असफल।
कुछ जीवित थे।
कुछ नहीं।
तभी सबसे बीच वाली स्क्रीन चमकी।
उसमें एक सिंहासन दिखाई दिया।
और उस सिंहासन पर बैठा था...
उज्ज्वल।
लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह नीली थीं।
और उसके सिर के पीछे वही विशाल आँख बनी हुई थी।
उज्ज्वल का गला सूख गया।
"वो कौन है?"
कुछ सेकंड सन्नाटा रहा।
फिर जवाब आया।
"अंतिम खिलाड़ी।"
उज्ज्वल कुछ और पूछ पाता...
उससे पहले सारी स्क्रीन टूट गईं।
...
वह वापस स्कूल में आ गया।
घुटनों के बल गिर पड़ा।
तेज सांसें।
कांपते हाथ।
सफेद कोट वाली लड़की उसके पास दौड़ी।
"तुमने क्या देखा?"
उज्ज्वल कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला—
"मेरे... हजारों रूप।"
लड़की का चेहरा उतर गया।
जैसे वह यही सुनने से डर रही थी।
"तो उसने तुम्हें देख लिया।"
"किसने?"
लड़की ने आसमान की तरफ देखा।
जहाँ विशाल आँख अब भी मौजूद थी।
"ऑब्ज़र्वर।"
पहली बार उसने उसका नाम लिया।
उज्ज्वल ने पूछा,
"वह क्या है?"
लड़की ने धीरे से कहा—
"इस दुनिया का खिलाड़ी नहीं।"
"इस दुनिया का नियम भी नहीं।"
"वह वह चीज़ है जो नियम लिखती है।"
उज्ज्वल के रोंगटे खड़े हो गए।
अचानक जमीन कांपने लगी।
सायरन बज उठा।
नीली स्क्रीन चमकी।
━━━━━━━━━━━━
Checkpoint Boss सक्रिय।
नाम: The Judge
उद्देश्य:
पहला चेकपॉइंट प्राप्त करें।
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पूरा स्कूल अंधेरे में डूब गया।
और फिर...
स्कूल के बीचों-बीच एक विशाल अदालत उभर आई।
ऊँची कुर्सियाँ।
लंबे गलियारे।
टूटी हुई घड़ियाँ।
और सबसे आगे...
एक खाली न्यायाधीश की कुर्सी।
उज्ज्वल ने इधर-उधर देखा।
"बॉस कहाँ है?"
तभी अदालत का दरवाजा अपने आप बंद हो गया।
धड़ाम!
और एक भारी आवाज गूंजी।
"खिलाड़ी 107।"
"तुम्हारा मुकदमा शुरू होता है।"
अचानक सामने वाली कुर्सी पर कोई बैठ गया।
लेकिन उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
वह काले कपड़े में ढका हुआ था।
"तुम पर आरोप है कि तुम जीना नहीं चाहते।"
उज्ज्वल चौंक गया।
"क्या?!"
"तुम पर आरोप है कि तुमने हार मानने की इच्छा की थी।"
"तुम पर आरोप है कि तुमने अपनी ही कहानी छोड़ दी थी।"
हर वाक्य के साथ अदालत कांपने लगी।
उज्ज्वल गुस्से में बोला—
"नहीं!"
"मैं हार नहीं मानना चाहता!"
तभी पूरा कमरा शांत हो गया।
न्यायाधीश ने पहली बार सिर उठाया।
और उज्ज्वल का खून जम गया।
क्योंकि उस कुर्सी पर बैठा हुआ चेहरा...
उसके पिता का था।
ठीक वैसा ही जैसा वह उन्हें आखिरी बार याद करता था।
और न्यायाधीश ने धीरे से कहा—
"अगर ऐसा है..."
"तो साबित करो।"
अचानक नीली स्क्रीन चमकी।
━━━━━━━━━━━━
Boss Battle Start
The Judge
जीत की शर्त:
अपने सबसे बड़े पछतावे का सामना करो।
━━━━━━━━━━━━
उज्ज्वल ने घबराकर लड़की की तरफ देखा।
लेकिन वह भी हैरान थी।
क्योंकि पहली बार...
बॉस ने नियम बदल दिए थे।
और दूर आसमान में...
ऑब्ज़र्वर की विशाल आँख मुस्कुरा रही थी।
अध्याय 6
अदालत में सन्नाटा छाया हुआ था।
उज्ज्वल की नजरें उस न्यायाधीश पर जमी थीं।
उसका चेहरा...
उसके पिता का था।
ठीक वैसा ही।
वही आँखें।
वही आवाज।
वही चेहरा जिसे उसने दो साल पहले आखिरी बार देखा था।
"नहीं..."
उज्ज्वल पीछे हट गया।
"तुम मेरे पापा नहीं हो।"
न्यायाधीश शांत बैठा रहा।
"सही कहा।"
"मैं तुम्हारे पिता नहीं हूँ।"
"मैं तुम्हारी याद हूँ।"
पूरा कमरा काँप उठा।
अचानक अदालत की दीवारें टूटने लगीं।
और उनके स्थान पर एक नया दृश्य उभर आया।
बारिश हो रही थी।
रात थी।
एक सड़क थी।
और सड़क के किनारे...
एक कार।
उज्ज्वल का दिल रुक गया।
"नहीं..."
वह दृश्य उसे याद था।
बहुत अच्छी तरह।
उस रात उसके पापा ऑफिस से लौट रहे थे।
और फिर...
एक दुर्घटना हुई थी।
उसके बाद वह कभी वापस नहीं आए।
उज्ज्वल ने हमेशा खुद को समझाया था कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी।
लेकिन सच्चाई...
कुछ और थी।
न्यायाधीश की आवाज गूंजी।
"उस दिन क्या हुआ था?"
उज्ज्वल चुप रहा।
"बताओ।"
उसकी मुट्ठियाँ भींच गईं।
"मैं नहीं बताऊँगा।"
"क्यों?"
"क्योंकि मैं याद नहीं करना चाहता!"
अचानक पूरा दृश्य बदल गया।
अब वह अपने पुराने घर में खड़ा था।
उसका छोटा संस्करण सामने था।
12 साल का उज्ज्वल।
वह गुस्से में अपने पिता से बात कर रहा था।
"आप हमेशा काम में लगे रहते हो!"
"आपको मेरी परवाह ही नहीं!"
उसके पिता कुछ कहना चाहते थे।
लेकिन छोटा उज्ज्वल सुनने को तैयार नहीं था।
उसने गुस्से में कहा—
"काश आप घर ही मत आया करो!"
यह सुनते ही वर्तमान वाला उज्ज्वल काँप उठा।
उसे याद आ गया।
यही आखिरी बात थी जो उसने अपने पिता से कही थी।
उस रात।
दुर्घटना से कुछ घंटे पहले।
कमरे में खामोशी छा गई।
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
"मैं..."
"मैंने ऐसा कहा था..."
न्यायाधीश बोला—
"और उसके बाद?"
उज्ज्वल घुटनों पर बैठ गया।
"उसके बाद... वो कभी वापस नहीं आए।"
वर्षों से दबा हुआ दर्द बाहर आने लगा।
"मैं जानता हूँ कि दुर्घटना मेरी वजह से नहीं हुई थी..."
"लेकिन..."
उसकी आवाज टूट गई।
"लेकिन मैं उनसे माफ़ी भी नहीं मांग पाया।"
पहली बार अदालत पूरी तरह शांत हो गई।
न कोई सायरन।
न कोई चेतावनी।
सिर्फ उसकी सिसकियाँ।
तभी उसके सामने उसके पिता का रूप खड़ा हो गया।
अब वह न्यायाधीश नहीं लग रहा था।
बस एक साधारण इंसान।
उन्होंने मुस्कुराकर कहा—
"उज्ज्वल।"
लड़के ने सिर उठाया।
"तुमने गलती की थी।"
उसका दिल बैठ गया।
लेकिन अगले ही पल—
"और मैंने भी।"
उज्ज्वल स्तब्ध रह गया।
"क्या?"
"मैं तुम्हारे साथ कम समय बिताता था।"
"मैं हमेशा सोचता था कि बाद में समय निकाल लूँगा।"
"लेकिन कभी बाद में आया ही नहीं।"
उज्ज्वल की आँखें फैल गईं।
वह कुछ बोल नहीं पाया।
उसके पिता ने आगे कहा—
"पछतावा हमें अतीत में बाँध देता है।"
"लेकिन माफ़ी..."
"हमें आगे बढ़ने देती है।"
उज्ज्वल रो पड़ा।
दो साल बाद पहली बार।
वह अपने दर्द से भाग नहीं रहा था।
वह उसका सामना कर रहा था।
पूरा संसार चमकने लगा।
नीली स्क्रीन प्रकट हुई।
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Boss Battle Complete
The Judge Defeated
पहला Checkpoint प्राप्त
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नई क्षमता अनलॉक
Echo Step Lv.1
मृत्यु के बाद पिछले 10 मिनट की एक स्मृति साथ ले जा सकते हैं।
━━━━━━━━━━━━
उज्ज्वल ने राहत की सांस ली।
उसने जीत लिया था।
पहला चेकपॉइंट।
पहली वास्तविक प्रगति।
लेकिन तभी...
कुछ अजीब हुआ।
सफेद कोट वाली लड़की अचानक डर गई।
बहुत ज्यादा।
उसकी आँखें आसमान की ओर उठ गईं।
"नहीं..."
"इतनी जल्दी नहीं..."
उज्ज्वल ने पूछा—
"क्या हुआ?"
लड़की की आवाज काँप रही थी।
"ऑब्ज़र्वर जाग गया है।"
अचानक पूरे आसमान में दरारें पड़ गईं।
और उन दरारों के पीछे...
उज्ज्वल ने कुछ देखा।
हजारों खिलाड़ी।
अनगिनत लोग।
जो अलग-अलग दुनियाओं में फँसे हुए थे।
और उन सबके बीच...
एक सिंहासन।
जिस पर कोई बैठा था।
उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
लेकिन एक बात साफ थी।
वह भी इंसान था।
और वह सीधे उज्ज्वल को देख रहा था।
फिर उसने मुस्कुराकर कहा—
"तो आखिरकार..."
"तुम यहाँ तक पहुँच ही गए।"
उज्ज्वल का दिल जोर से धड़का।
क्योंकि उसे अचानक महसूस हुआ...
यह गेम सिर्फ उसके लिए नहीं बनाया गया था।
वह किसी बहुत बड़े खेल का हिस्सा बन चुका था।
अध्याय 7
"तो आखिरकार... तुम यहाँ तक पहुँच ही गए।"
सिंहासन पर बैठे उस व्यक्ति की आवाज पूरे आकाश में गूँज उठी।
उज्ज्वल के शरीर में सिहरन दौड़ गई।
उसने ऊपर देखा।
हजारों टूटे हुए आसमानों के बीच वह सिंहासन हवा में तैर रहा था।
और उसके चारों ओर...
अनगिनत दरवाजे।
हर दरवाजे पर एक संख्या लिखी थी।
107...
452...
11...
999...
और हजारों अन्य।
"ये क्या है?" उज्ज्वल ने पूछा।
सफेद कोट वाली लड़की का चेहरा गंभीर हो गया।
"वे खिलाड़ी हैं।"
"क्या?"
"हर दरवाजा एक खिलाड़ी की दुनिया है।"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
मतलब...
वह अकेला नहीं था।
इस गेम में और भी लोग थे।
बहुत सारे।
तभी सिंहासन पर बैठा व्यक्ति धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
उसका चेहरा अब भी धुंध में छिपा था।
लेकिन उसकी आंखें दिखाई दे रही थीं।
नीली।
बिल्कुल उसी तरह जैसे उज्ज्वल ने पहले विज़न में देखी थीं।
"तुम मुझे नहीं जानते।"
"लेकिन मैं तुम्हें जानता हूँ।"
उज्ज्वल ने मुट्ठियाँ भींच लीं।
"तुम कौन हो?"
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर जवाब आया।
"खिलाड़ी नंबर 1।"
पूरा संसार जैसे थम गया।
लड़की की आँखें फैल गईं।
उज्ज्वल भी चौंक गया।
"पहला खिलाड़ी?"
वह आदमी मुस्कुराया।
"और शायद आखिरी भी।"
अचानक उसके पीछे हजारों स्क्रीन खुल गईं।
हर स्क्रीन पर कोई खिलाड़ी दिखाई दे रहा था।
कोई भाग रहा था।
कोई लड़ रहा था।
कोई रो रहा था।
कोई हार चुका था।
उज्ज्वल को महसूस हुआ...
यह गेम उसकी सोच से कहीं बड़ा था।
"ये सब यहाँ क्यों हैं?"
उस आदमी ने जवाब दिया—
"क्योंकि वास्तविक दुनिया में वे खो चुके थे।"
"अकेले।"
"टूटे हुए।"
"भूले हुए।"
उज्ज्वल चुप हो गया।
वह खुद भी तो ऐसा ही था।
तभी खिलाड़ी नंबर 1 ने उसकी ओर इशारा किया।
"लेकिन तुम अलग हो।"
"क्यों?"
"क्योंकि तुम उन्नीसवीं बार भी हार मानने को तैयार नहीं हुए।"
लड़की अचानक बीच में आ गई।
"बस!"
उसकी आवाज गूंज उठी।
"उससे बात मत करो!"
पहली बार खिलाड़ी नंबर 1 हंसा।
"तुम अब भी उसकी रक्षा कर रही हो?"
लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया।
लेकिन उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
उज्ज्वल ने यह बात नोटिस कर ली।
कुछ तो था...
जो लड़की उससे छिपा रही थी।
तभी अचानक पूरी दुनिया लाल रंग से भर गई।
━━━━━━━━━━━━
सिस्टम चेतावनी
क्षेत्रीय टकराव शुरू।
दो खिलाड़ी एक ही सत्य क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं।
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"क्या?"
उज्ज्वल कुछ समझ पाता उससे पहले...
उसके सामने हवा फट गई।
एक नया दरवाजा खुला।
उसमें से एक लड़का बाहर गिरा।
लगभग उसकी ही उम्र का।
काले बाल।
नीली जैकेट।
चेहरे पर घबराहट।
"नहीं!"
"मुझे वापस भेजो!"
वह चिल्लाया।
लेकिन दरवाजा बंद हो गया।
लड़का घबराकर इधर-उधर देखने लगा।
फिर उसकी नजर उज्ज्वल पर पड़ी।
"तुम... खिलाड़ी हो?"
उज्ज्वल ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
लड़का कुछ पल चुप रहा।
फिर अचानक उसके चेहरे पर राहत आ गई।
"भगवान का शुक्र है!"
"मैंने सोचा मैं अकेला हूँ!"
यह सुनकर उज्ज्वल को अजीब सा एहसास हुआ।
शायद पहली बार...
उसे किसी ने अपने जैसा समझा था।
"मेरा नाम आरव है।"
लड़के ने हाथ बढ़ाया।
उज्ज्वल कुछ पल रुका।
फिर उसने भी हाथ मिला लिया।
और उसी क्षण...
उसके सिर में तेज दर्द उठा।
एक अजीब दृश्य चमका।
आरव...
टूटा हुआ दरवाजा...
काला आसमान...
और...
आरव की लाश।
उज्ज्वल तुरंत पीछे हट गया।
"क्या हुआ?"
आरव ने पूछा।
उज्ज्वल कुछ नहीं बोला।
लेकिन उसकी नई क्षमता Echo Step सक्रिय हो चुकी थी।
और उसने जो देखा था...
वह भविष्य की झलक थी।
आरव मरने वाला था।
बहुत जल्द।
तभी आसमान में ऑब्ज़र्वर की आँख फिर खुल गई।
और इस बार उसने सीधे दोनों खिलाड़ियों की ओर देखा।
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विशेष मिशन सक्रिय
दो खिलाड़ियों में से केवल एक आगे बढ़ेगा।
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पूरा संसार खामोश हो गया।
उज्ज्वल और आरव एक-दूसरे को देखने लगे।
फिर अगली पंक्ति उभरी।
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विजेता को नया चेकपॉइंट मिलेगा।
हारने वाले का अस्तित्व मिटा दिया जाएगा।
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आरव का चेहरा सफेद पड़ गया।
उज्ज्वल की मुट्ठियाँ भींच गईं।
और दूर खड़ा खिलाड़ी नंबर 1...
मुस्कुरा रहा था।
जैसे उसे पहले से पता हो कि आगे क्या होने वाला है।
अध्याय 8
"हारने वाले का अस्तित्व मिटा दिया जाएगा।"
यह वाक्य हवा में चमकता रहा।
आरव और उज्ज्वल दोनों चुप थे।
कुछ सेकंड पहले तक वे सिर्फ दो खिलाड़ी थे।
अब सिस्टम उन्हें दुश्मन बना रहा था।
आरव ने कांपती आवाज में पूछा—
"मिटा दिया जाएगा... मतलब?"
कोई जवाब नहीं आया।
लेकिन दोनों समझ गए।
यह मौत से भी बदतर था।
रीसेट नहीं।
वापसी नहीं।
बस अंत।
उज्ज्वल ने तुरंत कहा—
"हम लड़ेंगे नहीं।"
आरव उसकी ओर देखने लगा।
"क्या?"
"सिस्टम जो चाहता है, हम वही क्यों करें?"
पहली बार आरव के चेहरे पर उम्मीद दिखी।
लेकिन उसी क्षण...
पूरी अदालत टूट गई।
जमीन दो हिस्सों में बंट गई।
और दोनों खिलाड़ी अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर खड़े हो गए।
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मिशन प्रारंभ
एक खिलाड़ी को सत्य प्राप्त करना होगा।
समय सीमा: 60 मिनट
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अचानक दोनों के सामने अलग-अलग दरवाजे प्रकट हुए।
उज्ज्वल के सामने लिखा था—
"जिसे तुम भूलना चाहते हो"
और आरव के सामने—
"जिससे तुम भाग रहे हो"
दरवाजे खुल गए।
दोनों अपने-अपने कमरों में खिंच गए।
...
उज्ज्वल ने आंखें खोलीं।
वह अपने स्कूल की छत पर खड़ा था।
रात थी।
हवा चल रही थी।
और छत के किनारे...
कोई बैठा था।
वह खुद था।
लेकिन यह टूटा हुआ उज्ज्वल नहीं था।
यह उससे भी छोटा था।
लगभग दस साल का।
वह चुपचाप आसमान देख रहा था।
"तुम कौन हो?"
उज्ज्वल ने पूछा।
बच्चे ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में आँसू थे।
"मैं वो हूँ..."
"जिसे तुमने छोड़ दिया।"
उज्ज्वल समझ नहीं पाया।
बच्चा धीरे-धीरे खड़ा हुआ।
"याद है?"
"जब तुमने तय किया था कि किसी से दोस्ती नहीं करोगे?"
अचानक दृश्य बदल गया।
छोटा उज्ज्वल स्कूल में खड़ा था।
कुछ बच्चे उसका मजाक उड़ा रहे थे।
वह उनके पास जाने की कोशिश करता है।
लेकिन फिर रुक जाता है।
धीरे-धीरे।
हर साल।
हर बार।
उसने कोशिश करना कम कर दिया।
फिर बंद कर दिया।
फिर अकेले रहना सीख लिया।
उज्ज्वल का दिल भारी हो गया।
बच्चे ने कहा—
"उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा था।"
"मैंने उम्मीद छोड़ दी थी।"
ये शब्द तीर की तरह लगे।
क्योंकि कहीं न कहीं...
वह सच था।
...
उधर।
आरव भी अपने परीक्षण से गुजर रहा था।
लेकिन अचानक...
उज्ज्वल के सामने एक स्क्रीन चमकी।
Echo Step सक्रिय हो गया।
उसे आरव दिखाई दिया।
वह किसी अंधेरे कमरे में था।
और उसके सामने...
उसकी छोटी बहन खड़ी थी।
रोती हुई।
"भैया..."
"मुझे अकेला मत छोड़ो..."
आरव जमीन पर गिर गया।
और जोर-जोर से रोने लगा।
उज्ज्वल स्तब्ध रह गया।
तो यही उसका सबसे बड़ा दर्द था।
...
तभी अचानक स्क्रीन लाल हो गई।
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विशेष सत्य मिला
खिलाड़ी आरव
रीसेट क्षमता नहीं रखता।
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उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"क्या?"
अगर आरव मर गया...
तो वह वापस नहीं आएगा।
एक भी बार नहीं।
तभी दूसरी सूचना आई।
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खिलाड़ी 107
रीसेट क्षमता: सक्रिय
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उज्ज्वल समझ गया।
सिस्टम ने यह मिशन जानबूझकर बनाया था।
एक ऐसा खिलाड़ी...
जो बार-बार लौट सकता था।
और एक ऐसा...
जिसे सिर्फ एक मौका मिला था।
तभी हवा में खिलाड़ी नंबर 1 की आवाज गूंजी।
"अब समझे?"
"यही कारण है कि बाकी खिलाड़ी तुमसे नफरत करेंगे।"
उज्ज्वल ने गुस्से से ऊपर देखा।
"क्यों?"
"क्योंकि तुम्हें दूसरा मौका मिलता है।"
"उन्हें नहीं।"
सन्नाटा छा गया।
यह बात उसने कभी सोची ही नहीं थी।
उसके लिए रीसेट एक श्राप था।
लेकिन किसी और के लिए...
वह सबसे बड़ी इच्छा हो सकती थी।
तभी पूरे क्षेत्र में अलार्म बज उठा।
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समय समाप्त होने में 5 मिनट शेष।
सत्य क्षेत्र विलय शुरू।
━━━━━━━━━━━━
दोनों दुनियाएं एक-दूसरे में मिलने लगीं।
उज्ज्वल और आरव फिर आमने-सामने आ गए।
लेकिन कुछ बदल चुका था।
आरव का चेहरा पीला था।
जैसे उसे भी कोई भयानक सच पता चल गया हो।
वह धीरे-धीरे बोला—
"उज्ज्वल..."
"अगर केवल एक ही बच सकता है..."
उज्ज्वल ने सिर हिलाया।
"तो हम कोई और रास्ता ढूंढेंगे।"
आरव हल्का सा मुस्कुराया।
लेकिन उसी पल...
उसके पीछे एक काला दरार खुल गया।
और उसमें से कोई बाहर आया।
उज्ज्वल का खून जम गया।
क्योंकि वह आरव था।
लेकिन उम्र में बड़ा।
बहुत बड़ा।
लगभग 30 साल का।
थका हुआ।
टूटा हुआ।
और उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
उसने धीरे से कहा—
"दूसरा रास्ता नहीं है।"
"मैंने 143 बार कोशिश की थी।"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"143 बार?"
वह आदमी मुस्कुराया।
"स्वागत है..."
"दूसरे खिलाड़ियों के असली नरक में।"
अध्याय 9
"मैंने 143 बार कोशिश की थी।"
यह सुनते ही उज्ज्वल और आरव दोनों जम गए।
सामने खड़ा आदमी...
भविष्य का आरव था।
उसकी आंखों में थकान नहीं...
खालीपन था।
जैसे उसने उम्मीद का मतलब ही भूल दिया हो।
"143 बार?"
उज्ज्वल ने धीरे से पूछा।
"लेकिन आरव के पास तो रीसेट शक्ति नहीं है।"
भविष्य का आरव हँसा।
एक दर्दभरी हँसी।
"अब नहीं है।"
"लेकिन कभी थी।"
पूरा क्षेत्र अचानक शांत हो गया।
दूर खड़ा खिलाड़ी नंबर 1 भी पहली बार गंभीर दिखाई दिया।
उज्ज्वल का दिल तेजी से धड़कने लगा।
"क्या मतलब?"
भविष्य का आरव उसकी तरफ बढ़ा।
"इस गेम में कुछ लोग चुने जाते हैं।"
"लेकिन कुछ लोग शक्ति छीनने की कोशिश करते हैं।"
अचानक उसके पीछे सैकड़ों टूटे हुए दृश्य दिखाई देने लगे।
विभिन्न खिलाड़ी।
विभिन्न दुनियाएँ।
और हर जगह...
धोखा।
विश्वासघात।
लालच।
"रीसेट इस गेम की सबसे दुर्लभ शक्ति है।"
"और सबसे खतरनाक भी।"
उज्ज्वल चुप रहा।
भविष्य का आरव आगे बोला—
"क्योंकि जो बार-बार मर सकता है..."
"वह धीरे-धीरे मौत से डरना बंद कर देता है।"
ये शब्द सीधे उज्ज्वल के दिल में उतर गए।
उसे याद आया—
पहली मौत।
दूसरी।
तीसरी।
हर बार डर थोड़ा कम हुआ था।
क्या सच में...
वह बदल रहा था?
तभी अचानक सफेद कोट वाली लड़की सामने आ गई।
"बस करो।"
उसकी आवाज कठोर थी।
"तुम उसे वही रास्ता दिखा रहे हो जो तुम्हें बर्बाद कर चुका है।"
भविष्य का आरव कुछ पल उसे देखता रहा।
फिर बोला—
"और तुम अब भी उसे सच्चाई नहीं बता रही।"
उज्ज्वल ने तुरंत उसकी ओर देखा।
"कौन सी सच्चाई?"
लड़की चुप हो गई।
फिर हमेशा की तरह नजरें झुका लीं।
उज्ज्वल को गुस्सा आ गया।
"हर बार यही!"
"तुम कुछ छिपाती क्यों हो?"
कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।
फिर भविष्य का आरव मुस्कुराया।
"क्योंकि अगर वह बता दे..."
"तो शायद तुम उससे नफरत करने लगो।"
लड़की का चेहरा सफेद पड़ गया।
उज्ज्वल ने पहली बार महसूस किया...
कि यह बात उसे सच में डरा रही थी।
...
तभी सिस्टम सक्रिय हो गया।
━━━━━━━━━━━━
सत्य क्षेत्र विलय पूर्ण।
अंतिम निर्णय प्रारंभ।
━━━━━━━━━━━━
पूरा संसार कांप उठा।
आसमान फटने लगा।
और बीच में एक विशाल दरवाजा प्रकट हुआ।
काले रंग का।
पहले देखे गए सभी दरवाजों से बड़ा।
उस पर केवल एक शब्द लिखा था—
"ORIGIN"
उज्ज्वल ने वह शब्द पहले कभी नहीं देखा था।
लेकिन उसे अजीब सा एहसास हुआ।
जैसे यह दरवाजा...
हर चीज की शुरुआत हो।
खिलाड़ी नंबर 1 अचानक गंभीर हो गया।
"नहीं।"
"इतनी जल्दी नहीं।"
भविष्य का आरव भी पीछे हट गया।
पहली बार उसके चेहरे पर डर दिखाई दिया।
उज्ज्वल समझ नहीं पाया।
"क्या हुआ?"
तभी लड़की ने फुसफुसाकर कहा—
"यह दरवाजा नहीं खुलना चाहिए।"
"क्यों?"
उसने कांपती आवाज में जवाब दिया—
"क्योंकि इसके पीछे..."
"पहला रीसेट छिपा है।"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
पहला रीसेट।
मतलब...
इस पूरी कहानी की शुरुआत।
तभी दरवाजे में दरार पड़ी।
फिर दूसरी।
फिर तीसरी।
और अचानक...
वह अपने आप खुल गया।
अंदर कुछ नहीं था।
सिर्फ सफेद रोशनी।
लेकिन उस रोशनी में एक आकृति दिखाई दे रही थी।
एक बच्चा।
लगभग उज्ज्वल की उम्र का।
वह अकेला खड़ा था।
सिर झुकाए हुए।
और उसके हाथ में...
एक टूटी हुई घड़ी थी।
जैसे ही उसने सिर उठाया—
उज्ज्वल का खून जम गया।
क्योंकि वह बच्चा...
बिल्कुल उसके जैसा दिखता था।
लेकिन वह टूटा हुआ उज्ज्वल नहीं था।
न कोई भविष्य का संस्करण।
न कोई याद।
कुछ और।
बहुत पुराना।
बहुत गहरा।
और उसने धीरे से कहा—
"तुम आखिरकार वापस आ गए।"
"107।"
उज्ज्वल के शरीर में बिजली सी दौड़ गई।
"तुम मुझे जानते हो?"
बच्चे ने मुस्कुराकर जवाब दिया—
"जानता हूँ?"
"मैं तो तुम्हारे साथ पहले दिन से हूँ।"
दूर आसमान में ऑब्ज़र्वर की विशाल आँख अचानक खुल गई।
पहली बार...
उसमें घबराहट दिखाई दी।
और खिलाड़ी नंबर 1 ने धीरे से फुसफुसाया—
"असंभव..."
"वह अभी जाग नहीं सकता था..."
उज्ज्वल ने उसकी तरफ देखा।
"वह कौन है?"
कुछ सेकंड तक पूरा संसार खामोश रहा।
फिर खिलाड़ी नंबर 1 ने जवाब दिया—
"अगर वह सच में जाग गया है..."
"तो इसका मतलब है कि इस गेम का असली खिलाड़ी..."
"तुम कभी थे ही नहीं।"
अध्याय 10
"इस गेम का असली खिलाड़ी... तुम कभी थे ही नहीं।"
खिलाड़ी नंबर 1 के शब्द पूरे संसार में गूंज उठे।
उज्ज्वल स्तब्ध खड़ा था।
उसका दिमाग जवाब देना बंद कर चुका था।
"क्या मतलब?"
उसने कांपती आवाज में पूछा।
लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
सभी की नजरें उस बच्चे पर टिकी थीं।
वही बच्चा...
जो ORIGIN दरवाजे के अंदर खड़ा था।
वही चेहरा।
वही आंखें।
वही आवाज।
लेकिन उसके अंदर कुछ अलग था।
कुछ ऐसा जो इंसानी नहीं लग रहा था।
बच्चे ने अपनी टूटी हुई घड़ी को देखा।
फिर मुस्कुराया।
"बहुत समय हो गया।"
"तुम मुझे भूल गए, 107।"
उज्ज्वल का सिर दर्द से भर गया।
अचानक...
उसके दिमाग में अनगिनत आवाजें गूंजने लगीं।
━━━━━━━━━━━━
त्रुटि...
स्मृति अवरोध टूट रहा है...
━━━━━━━━━━━━
वह घुटनों पर गिर पड़ा।
और तभी...
उसे पहली बार एक पुरानी याद दिखाई दी।
...
सफेद दुनिया।
एक छोटा लड़का।
अकेला।
चारों ओर खालीपन।
कोई परिवार नहीं।
कोई दोस्त नहीं।
कोई आवाज नहीं।
सिर्फ अनंत सन्नाटा।
वह लड़का रो रहा था।
बहुत देर तक।
बहुत वर्षों तक।
फिर एक दिन...
उसने समय को रोक दिया।
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"नहीं..."
याद आगे बढ़ी।
वह लड़का समय को मोड़ने लगा।
उसे तोड़ने लगा।
उसे जोड़ने लगा।
और फिर...
पहला रीसेट हुआ।
...
दृश्य समाप्त हो गया।
उज्ज्वल हांफते हुए वापस वर्तमान में आ गया।
उसके माथे पर पसीना था।
"वो..."
"वो लड़का कौन है?"
सफेद कोट वाली लड़की ने आंखें बंद कर लीं।
जैसे वह यह पल आने से डर रही थी।
बच्चे ने खुद जवाब दिया।
"मैं पहला खिलाड़ी नहीं हूँ।"
"मैं पहला रीसेट हूँ।"
पूरा संसार हिल गया।
उज्ज्वल कुछ समझ नहीं पाया।
"पहला... रीसेट?"
बच्चे ने सिर हिलाया।
"जब समय पहली बार टूटा था..."
"मैं पैदा हुआ था।"
खिलाड़ी नंबर 1 की मुट्ठियां भींच गईं।
वह पहली बार गुस्से में दिखाई दिया।
"चुप रहो।"
बच्चा हंस पड़ा।
"तुम अब भी डरते हो?"
"इतने वर्षों बाद भी?"
अचानक उज्ज्वल ने एक अजीब बात महसूस की।
खिलाड़ी नंबर 1...
ऑब्ज़र्वर...
भविष्य का आरव...
यहां तक कि सफेद कोट वाली लड़की भी...
सब उस बच्चे से डर रहे थे।
क्यों?
तभी बच्चा धीरे-धीरे उज्ज्वल के सामने आ गया।
"क्या तुम जानना चाहते हो कि तुम्हें 107 क्यों कहा जाता है?"
उज्ज्वल ने तुरंत सिर हिलाया।
बच्चे ने अपनी टूटी हुई घड़ी उसकी ओर बढ़ा दी।
"छुओ इसे।"
लड़की अचानक चीखी।
"नहीं!"
"उज्ज्वल मत—"
लेकिन देर हो चुकी थी।
उज्ज्वल ने घड़ी को छू लिया।
...
और पूरा संसार गायब हो गया।
...
इस बार उसने खुद को एक विशाल कमरे में पाया।
कमरे के अंदर 106 कुर्सियां थीं।
सभी खाली।
और सबसे आखिर में...
107वीं कुर्सी।
जिस पर उसका नाम लिखा था।
उज्ज्वल।
उसका दिल जोर से धड़कने लगा।
तभी पीछे से आवाज आई।
"अब समझे?"
वह पलटा।
बच्चा वहीं खड़ा था।
"तुम 107वें खिलाड़ी नहीं हो।"
"तुम 107वां प्रयास हो।"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"क्या?"
बच्चे की मुस्कान गायब हो गई।
पहली बार उसका चेहरा गंभीर हुआ।
"तुमसे पहले 106 उज्ज्वल थे।"
"106 अलग जीवन।"
"106 अलग चुनाव।"
"106 अलग अंत।"
कमरा अचानक बदलने लगा।
हर कुर्सी पर अब कोई बैठा था।
सभी का चेहरा एक जैसा था।
उज्ज्वल जैसा।
लेकिन हर एक अलग।
कोई टूटा हुआ।
कोई पागल।
कोई मुस्कुराता हुआ।
कोई रोता हुआ।
उज्ज्वल पीछे हट गया।
"ये... ये सब मैं हूँ?"
बच्चे ने सिर हिलाया।
"था।"
"और अगर तुम भी असफल हुए..."
"तो तुम 108 बन जाओगे।"
सन्नाटा छा गया।
उज्ज्वल का दिल डूब गया।
मतलब...
उसकी पूरी जिंदगी...
उसकी पूरी पहचान...
शायद एक दोहराव थी।
एक और कोशिश।
एक और प्रयोग।
तभी टूटी हुई घड़ी में दरार पड़ने लगी।
बच्चे का चेहरा बदल गया।
"ओह..."
"वे मुझे ढूंढ चुके हैं।"
आसमान अचानक काला हो गया।
और पहली बार...
ऑब्ज़र्वर स्वयं प्रकट हुआ।
वह विशाल आंख नहीं थी।
वह एक इंसानी आकृति थी।
लंबा काला कोट।
चेहरा धुंध से ढका हुआ।
और उसकी नजर सीधे उस बच्चे पर थी।
फिर उसने कहा—
"तुम्हें मिटा दिया जाना चाहिए था।"
बच्चा मुस्कुराया।
"और तुम्हें कभी बनाया नहीं जाना चाहिए था।"
उज्ज्वल ने महसूस किया...
कि वह किसी युद्ध के बीच खड़ा है।
एक ऐसा युद्ध...
जो उसकी कहानी शुरू होने से बहुत पहले शुरू हो चुका था।
और अगले ही पल...
ऑब्ज़र्वर ने उसकी ओर देखकर कहा—
"107..."
"अब समय आ गया है कि तुम जानो..."
"तुम्हारी सबसे बड़ी मौत अभी तक हुई ही नहीं है।"
अध्याय 11
"तुम्हारी सबसे बड़ी मौत अभी तक हुई ही नहीं है।"
ऑब्ज़र्वर की आवाज पूरे संसार में गूंज उठी।
उज्ज्वल वहीं खड़ा रह गया।
उसे समझ नहीं आया।
"सबसे बड़ी मौत?"
"मैं तो पहले ही कई बार मर चुका हूँ।"
ऑब्ज़र्वर कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला—
"तुम्हारे शरीर की मौत नहीं।"
"तुम्हारी पहचान की मौत।"
पूरा कमरा कांप उठा।
107 कुर्सियां अचानक हवा में उठ गईं।
उन पर बैठे सभी उज्ज्वल एक साथ उसकी ओर देखने लगे।
106 चेहरे।
106 अलग जिंदगियां।
106 अलग असफलताएं।
और फिर...
सभी एक साथ बोले—
"हम तुम हैं।"
उज्ज्वल का सिर फटने लगा।
उसे लग रहा था जैसे हजारों यादें एक साथ उसके अंदर घुस रही हों।
वह चीख पड़ा।
"बस!"
लेकिन यादें रुकने वाली नहीं थीं।
...
पहला उज्ज्वल।
जिसने हार मान ली थी।
...
तेरहवां उज्ज्वल।
जिसने शक्ति के लालच में सबको धोखा दिया।
...
बयालीसवां उज्ज्वल।
जिसने ऑब्ज़र्वर का साथ दे दिया।
...
सत्तरवां उज्ज्वल।
जो अकेलेपन में पागल हो गया।
...
और फिर...
106वां उज्ज्वल।
जिसने आखिरी क्षण तक लड़ाई लड़ी।
लेकिन फिर भी हार गया।
उज्ज्वल रो पड़ा।
क्योंकि उसने महसूस किया—
ये सिर्फ यादें नहीं थीं।
ये सचमुच उसकी ही जिंदगियां थीं।
हर असफलता।
हर दर्द।
हर पछतावा।
उसका अपना था।
तभी सफेद कोट वाली लड़की आगे बढ़ी।
"अब और नहीं।"
उसकी आवाज कांप रही थी।
ऑब्ज़र्वर ने उसकी ओर देखा।
"तुम अब भी उसे बचाना चाहती हो?"
"हाँ।"
पहली बार उसने बिना डरे जवाब दिया।
ऑब्ज़र्वर शांत हो गया।
फिर धीरे से बोला—
"तो उसे सच्चाई बता दो।"
संसार अचानक शांत हो गया।
उज्ज्वल ने लड़की की ओर देखा।
वह वर्षों से जिस जवाब का इंतजार कर रहा था...
वह अब मिलने वाला था।
लड़की की आंखों में आंसू भर आए।
"मुझे माफ करना।"
"मैंने तुमसे झूठ नहीं बोला..."
"लेकिन पूरा सच भी नहीं बताया।"
उज्ज्वल धीरे से बोला—
"तुम हो कौन?"
कुछ सेकंड तक केवल सन्नाटा रहा।
फिर उसने कहा—
"मेरा नाम आर्या है।"
उज्ज्वल का दिल एक पल के लिए रुक गया।
जैसे यह नाम वह कहीं सुन चुका हो।
बहुत पहले।
बहुत गहराई में।
और तभी...
एक भूली हुई याद लौट आई।
...
सफेद दुनिया।
पहला रीसेट।
एक अकेला लड़का।
और उसके पास बैठी एक लड़की।
जो उसे मुस्कुराकर कह रही थी—
"जब तक मैं हूँ..."
"तुम अकेले नहीं हो।"
...
याद समाप्त हो गई।
उज्ज्वल की आंखें फैल गईं।
"तुम..."
"तुम शुरू से मेरे साथ थीं?"
आर्या ने सिर हिलाया।
"पहले प्रयास से।"
"पहले रीसेट से।"
"पहली मौत से।"
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
"मतलब..."
आर्या की आंखों से आंसू बह निकले।
"मैंने तुम्हें 106 बार मरते देखा है।"
"106 बार टूटते देखा है।"
"106 बार तुम्हें खोया है।"
कमरे में खामोशी छा गई।
पहली बार उज्ज्वल ने उसके दर्द को महसूस किया।
हर बार वह रीसेट होकर वापस आ जाता था।
लेकिन आर्या...
सब कुछ याद रखती थी।
हर मौत।
हर विदाई।
हर अंत।
तभी पहला रीसेट वाला बच्चा मुस्कुराया।
"अब तुम समझ रहे हो।"
"असल में सबसे अकेला कौन था।"
उज्ज्वल का गला भर आया।
वह कुछ कह नहीं पाया।
लेकिन तभी...
ऑब्ज़र्वर ने अपना हाथ उठाया।
पूरा संसार कांपने लगा।
107 कुर्सियां टूटने लगीं।
आसमान बिखरने लगा।
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अंतिम चरण प्रारंभ
107वां प्रयास सत्य के निकट पहुँच चुका है।
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उज्ज्वल ने ऊपर देखा।
"क्या हो रहा है?"
ऑब्ज़र्वर की आवाज गूंजी—
"अब अंतिम चुनाव होगा।"
"वही चुनाव..."
"जिसमें 106 बार तुम असफल हुए।"
उज्ज्वल का दिल धड़क उठा।
"कौन सा चुनाव?"
ऑब्ज़र्वर ने उसकी आंखों में देखा।
और पहली बार...
उसने अपना चेहरा दिखाया।
उज्ज्वल पीछे हट गया।
क्योंकि ऑब्ज़र्वर का चेहरा...
उसी का था।
लेकिन उम्र में बहुत बड़ा।
और उसकी आंखों में अनगिनत रीसेट्स की थकान थी।
फिर उसने कहा—
"क्योंकि मैं..."
"107वां नहीं।"
"मैं अंतिम उज्ज्वल हूँ।"
अध्याय 12
"मैं अंतिम उज्ज्वल हूँ।"
ऑब्ज़र्वर की आवाज पूरे अस्तित्व में गूंज उठी।
उज्ज्वल स्तब्ध रह गया।
उसके सामने खड़ा व्यक्ति...
जिसे वह शुरू से दुश्मन समझता आया था...
वह खुद था।
लेकिन एक ऐसा संस्करण...
जो अनगिनत रीसेट्स के अंत तक पहुँच चुका था।
आर्या की आंखों में आँसू आ गए।
पहले रीसेट वाला बच्चा चुप हो गया।
और 106 उज्ज्वलों की परछाइयाँ हवा में स्थिर हो गईं।
"क्यों...?"
उज्ज्वल ने कांपती आवाज में पूछा।
"तुम ऑब्ज़र्वर कैसे बने?"
कुछ देर तक खामोशी रही।
फिर अंतिम उज्ज्वल मुस्कुराया।
दुखभरी मुस्कान।
"क्योंकि मैं जीत गया था।"
पूरा संसार शांत हो गया।
"क्या?"
"106वें प्रयास में..."
"मैं आखिरकार अंतिम दरवाजे तक पहुँच गया था।"
अचानक हवा में एक दृश्य उभर आया।
एक पुरानी याद।
106वां उज्ज्वल अंतिम द्वार के सामने खड़ा था।
उसे दो विकल्प मिले थे।
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1. दुनिया को बचाओ।
2. रीसेट को समाप्त करो।
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"मैंने दुनिया को बचाने का चुनाव किया।"
अंतिम उज्ज्वल बोला।
"लेकिन तब मुझे सच्चाई पता चली।"
उज्ज्वल चुपचाप सुनता रहा।
"यह गेम कभी खेल था ही नहीं।"
"यह एक मशीन थी।"
"जो अकेले लोगों को दूसरा मौका देती थी।"
"लेकिन हर नया मौका..."
"किसी पुराने प्रयास को मिटा देता था।"
उज्ज्वल की आंखें फैल गईं।
उसे अचानक सब समझ आने लगा।
106 उज्ज्वल।
143 बार वाला आरव।
हजारों खिलाड़ी।
वे सब...
इस मशीन की कीमत थे।
तभी पहला रीसेट वाला बच्चा आगे आया।
"मैं समय का घाव हूँ।"
"और यह दुनिया उस घाव पर लगाया गया पट्टा।"
"जब तक रीसेट चलता रहेगा..."
"कोई सच में आगे नहीं बढ़ पाएगा।"
आर्या ने धीरे से कहा—
"लेकिन अगर रीसेट खत्म हो गया..."
"तो हम सब गायब हो जाएंगे।"
सन्नाटा।
उज्ज्वल का दिल बैठ गया।
"हम सब?"
आर्या मुस्कुराई।
पहली बार।
वैसी मुस्कान जैसी उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
"मैं भी।"
उसकी सांस रुक गई।
"नहीं।"
आर्या ने सिर हिलाया।
"मैं इस दुनिया के साथ बंधी हूँ।"
"अगर रीसेट खत्म हुआ..."
"तो मेरा अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा।"
उज्ज्वल पीछे हट गया।
"नहीं..."
"कोई और रास्ता होगा।"
लेकिन पहली बार...
किसी ने कुछ नहीं कहा।
क्योंकि सब जानते थे।
कोई दूसरा रास्ता नहीं था।
...
कुछ देर बाद।
अंतिम द्वार खुल गया।
उसके पीछे केवल सफेद रोशनी थी।
और दो विकल्प।
━━━━━━━━━━━━
रीसेट जारी रखो
या
सभी प्रयासों को मुक्त करो
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106 उज्ज्वल चुप थे।
आरव चुप था।
पहला रीसेट चुप था।
यहाँ तक कि अंतिम उज्ज्वल भी।
निर्णय केवल 107वें उज्ज्वल का था।
उज्ज्वल की नजर आर्या पर गई।
उसने याद किया—
पहली मौत।
पहला डर।
पहला चेकपॉइंट।
हर बार...
आर्या उसके साथ थी।
वह रो पड़ा।
"मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।"
आर्या की आंखें भर आईं।
लेकिन वह मुस्कुराई।
"इसलिए तो तुम्हें मुझे जाने देना होगा।"
ये शब्द उसके दिल में उतर गए।
क्योंकि पहली बार...
उसे समझ आया।
रीसेट का मतलब जीना नहीं था।
रीसेट का मतलब था...
अतीत को छोड़ने से डरना।
...
उज्ज्वल धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
और उसने दूसरा विकल्प चुन लिया।
━━━━━━━━━━━━
सभी प्रयासों को मुक्त करो
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पूरा संसार कांप उठा।
106 कुर्सियां रोशनी में बदल गईं।
143 बार वाला आरव मुस्कुराने लगा।
हजारों खिलाड़ियों की दुनियाएं टूटने लगीं।
लेकिन इस बार...
डर नहीं था।
सिर्फ शांति थी।
अंतिम उज्ज्वल ने आंखें बंद कर लीं।
"धन्यवाद।"
और वह हवा में विलीन हो गया।
पहला रीसेट वाला बच्चा मुस्कुराया।
"अब समय फिर से बह सकेगा।"
और वह भी गायब हो गया।
...
आखिर में केवल आर्या बची।
और उज्ज्वल।
दोनों सफेद दुनिया में खड़े थे।
जैसे पहली बार मिले थे।
आर्या धीरे से उसके पास आई।
"तुम सफल हो गए।"
उज्ज्वल रो पड़ा।
"मैं तुम्हें भूलना नहीं चाहता।"
आर्या ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"तुम भूलोगे नहीं।"
"तुम बस आगे बढ़ोगे।"
फिर उसने धीरे से उसकी हथेली में कुछ रखा।
वही टूटी हुई घड़ी।
जो पहले रीसेट के बच्चे के पास थी।
"जब भी अकेला महसूस करो..."
"याद रखना।"
"कभी तुम अकेले नहीं थे।"
उज्ज्वल कुछ बोल पाता...
उससे पहले आर्या रोशनी में बदलने लगी।
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान थी।
"अलविदा, उज्ज्वल।"
"और..."
"इस बार..."
"जीना मत भूलना।"
वह गायब हो गई।
...
...
...
उज्ज्वल की आंख खुली।
वह अपने कमरे में था।
सुबह हो चुकी थी।
मोबाइल बंद पड़ा था।
कोई गेम नहीं।
कोई सिस्टम नहीं।
कोई रीसेट नहीं।
सब खत्म हो चुका था।
कुछ देर तक वह चुप बैठा रहा।
फिर उसकी नजर मेज पर गई।
वहाँ एक चीज रखी थी।
एक टूटी हुई घड़ी।
उज्ज्वल की सांस रुक गई।
उसने उसे उठाया।
और पहली बार...
वह मुस्कुराया।
सचमुच मुस्कुराया।
...
उस दिन स्कूल में...
एक लड़का उसके पास आया।
"हाय।"
"मैं नया हूँ।"
"दोस्त बनोगे?"
कुछ सेकंड तक उज्ज्वल उसे देखता रहा।
फिर उसने हाथ बढ़ा दिया।
"हाँ।"
और कहीं...
बहुत दूर...
एक सफेद दुनिया में...
कोई मुस्कुरा रहा था।
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GAME OVER
NO RESET AVAILABLE
LIFE STARTED
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